220 साल के हुए मिर्ज़ा ग़ालिब, गूगल ने किया याद

दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले शायर मिर्ज़ा ग़ालिब का जन्मदिन बुधवार को है. इसके लिए गूगल ने भी अपने डूडल में परिवर्तन किया है. मिर्ज़ा ग़ालिब के बारे में बताया जाए तो यह किसी परिचय के मोहताज नहीं है. दुनिया में बहुत कम ऐसे लोग होंगे जो इन्हें नहीं जानते होंगे. शायरी की बात कही जाए तो यह जब महफिल में जाया करते थे तो वहा भूचाल आ जाता था. कही पर भी खड़े खड़े शायरी बनाने वाले, कुछ ऐसे थे मिर्ज़ा ग़ालिब.

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आज के वक्त में भी मिर्ज़ा ग़ालिब की गजले लोगों की जुबा पर चढ़ी रहती हैं. मिर्ज़ा ग़ालिब तरह तरह की शायरियों के लिए काफी मशहूर थे. आज के वक्त में भी उनकी गजल कई जगह और यहां तक की फिल्मी गानों में भी उनकी गजल ‘ये इश्क नहीं आसां, बस इतना समझ लीजिए इक आग का दरिया है और डूबकर जाना है’ सुनने को मिल जाते हैं. बुधवार को मिर्ज़ा ग़ालिब का 220वां जन्मदिन है. मिर्ज़ा ग़ालिब का जन्म 27 दिसंबर साल 1796 में यूपी के आगरा शहर में हुआ था. मिर्ज़ा ग़ालिब का पूरा नाम असद उल्लाह बेग खां उर्फ गालिब था. उनका परिवार सैनिक पृष्ठभूमि का था.

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