पहले भी ‘नीचता’ के कारण अय्यर ने बटोरी हैं सुर्खियां

बुरे फंसे मणिशंकर अय्यर मोदी जी को “नीच” बोल कर उनके इस एक शब्द ने पूरी काया ही पलट दी है. इस मामले में राहुल बाबा भी बोल उठे कि ये उनकी संस्कृति नही है, अपशब्दों के इस्तेमाल की. लिहाजा अय्यर माफी मांगें. अब ये तो वाकई सुसंस्कृत है इसलिए कह रहे है या फिर गुजरात में बेपटरी गाड़ी कही गड्ढे में न गिर जाए इसलिए बोल रहे हैं. फिलहाल राहुल की राहुल जाने में तो बस इतना कहना चाहता हूं, जब अय्यर जी को अपनी मातृभाषा का ज्ञान ही नही है, तो उनसे उम्मीद क्या की जा सकती है.

mani shankar aiyar

पूर्व में भी अपनी उच्च हिंदी के ज्ञान के कारण पूर्व पीएम अटल जी को भी “नालायक” शब्द से सम्बोधित कर चुके हैं. अम्बेडकर जी ने भी संविधान में सबको अपनी बात कहने का अधिकार दे रखा है, तो लिहाजा उस हिसाब से अय्यर जी को अधिकार है आपने ‘ मन की बात’ को कहने का पर भईया ‘मनकी बात’ को ऐसे ‘फन की बात’ तो नहीं बनाना चाहिए. वैसे किसी को फायदा हो या न हो पर मुझे एक बात का फायदा जरुर मिला है, की मुहावरे और लोकोक्ति याद नहीं करनी पड़ती बस अब न्यूज़ चैनल लगा लो, “मौत का सौदागर , गंदी नाली का कीड़ा, रेबीज़, बीमारी का शिकार, भस्मासुर, गंगू तेली, आदि सुनने को मिल जाता है. अच्छा है बढ़िया हिंदी शब्दकोश बन रहा है.

mani shankar aiyar

नहीं यह मत सोचना कि में किसी के पक्ष में बोल रही हूं में सिर्फ ये कहना चाह रही हूं, पार्टी चाहे जो भी तो सत्तारूढ़ या विरोधी दोनो से हम आम लोग यही उम्मीद करते है कि वो कोई भी ऐसी हरकत न करें जिससे कि स्वयं की नज़रों में तो गिरे ही, देश दुनिया में भी ‘नीच’ बन जाये. आरोप प्रत्यारोप अच्छी बात है, लेकिन सीमाउलंघन उचित नही है. आप सब ऐसी शख्सियत है जिन्हें लोग अपना रोल मॉडल मानते है ? क्या यही है भारत की संस्कृति सभ्यता ? जब जब विदेशी और मुग़ल सोच का सहारा लोगे तब तब मुंह की खाओगे . अब फैसला जनता जनार्दन के हाथ में है.

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