मन को मोह ले, कुछ ऐसा है ये ट्रेड फेयर

नई दिल्ली। हर साल होने वाले ट्रेड फेयर का आयोजन दिल्ली में इस बार भी काफी जोर शोर से चलाया गया। इस बार दिल्ली के प्रगति मैदान में 37 वे अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड फेयर का आयोजन किया गया जिसमें लोगों ने भारी मात्रा में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। ट्रेड फेयर के बारे में और जाने तो यह साल 1980 से चला आ रहा है। इस साल भी इसका आयोजन इंडिया ट्रेड मोशन आर्गेनाईजेशन (ITPO) द्वारा आयोजित किया गया। हर बार की तरह इस बार भी यहां की रोनक हर साल लगने वाले अलग अलग राज्यों के स्टॉलों ने बढ़ाई। जिनमें हर राज्यों की संस्कृति व विशेष चीजों को ध्यान में रखते हुए इसे लोगों के आकर्षण का केंद्र बनाया गया।

इस साल ट्रेड फेयर का आयोजन 14 से 27 नवंबर तक किया गया। जिसमें ”स्टार्ट-अप एंड स्टैंड-अप इंडिया” पर खासा जोर दिया गया। यहां पर रोजमर्रा के सामान के साथ कुछ ऐसी वस्तुएं भी मोजूद थी जोकि बहुत ही मुश्किलों से पाई जाती हैं। यहां पर ऑटो मोबाइल पार्ट से लेकर बच्चों के लिए खिलौने तक मोजूद थे। स्टार्ट-अप इंडिया में अहम भूमिका निभाने वाला खादी भी हर स्टाल पर देखने को मिला। इसके साथ ही ट्रेड फेयर में खाने पिने का भी अच्छा इंतजाम था। कुछ-कुछ राज्य जैसे बिहार, पंजाब, कर्नाटक के स्थानीय व्यंजनों ने लोगों को इसे चखने को मजबूर कर दिया। फेयर में राजधानी दिल्ली का स्टाल भी लगाया गया जिसमें दिल्ली जलबोर्ड, दिल्ली स्वास्थ्य सेवाएं, तिहाड़ जेल के कैदियों द्वरा निर्मित वस्तुएं, इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल्स आदि चीजें शामिल थी।

दिल्ली

ट्रेड फेयर में जाने के बाद जनहित खबर से संवाददाता दिपांशु पांडे और कैमरा मैन हरमिंदर सिंह ने कई चीजों के अपने कैमरे में कैद किया। यहां जाने के बाद सबसे पहले उन्हें दिल्ली के तिहाड़ जेल के स्टॉल पर गई। जहां पर यहां पर कई प्रकार के उत्पाद रखे हुए थे जोकि काफी खूबसूरत थे। दिल्ली के स्टॉल पर जेलर जितेंद्र पटेल से जनहित खबर की टीम की मुलाकात हुई। जितेंद्र पटेल ने जानकारी दी कि स्टॉल पर रखा सारा सामान जेल के अंदर बंद कैदियों ने बनाया है तथा इसे बेचने के बाद जो भी पैसा एकत्रित किया जाता है वह पैसा सरकार से होते हुए कैदियों के पास जाया जाता है।

छत्तीसगढ़

आगे जाकर जनहित खबर की टीम की नजर छत्तीसगढ़ के स्टॉल पर गई। यहां पर टेक्सटाइल नेशनल अवॉर्ड विजेता निलांबर प्रसाद ने बताया कि ट्रेड फेयर और इसके जैसे अन्य कार्यक्रमों में ही वह अपने सामान के लोगों तक पहुंचाते हैं। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वह अपने गांव में जाकर बुनाई का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि टेस्सटाइल का काम उनका काफी मशहूर है। इसके लिए उनके पिता और छोटे भाई राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित भी किया गया है।

पंजाब

पंजाब के स्टॉल पर पहुंचने के बाद यहां सचिव द्विवेदी ने बताया कि ट्रेड फेयर में उन्हें अच्छा खासा मुनाफा हो जाता है। सचिन द्विवेदी ने बताया कि वह अपने स्टॉल पर लस्सियां लोगों को पिला रहे हैं। अगर लस्सियों की बात की जाए तो यहां पर लोगों में इसे लेने के लिए होड़ लगी हुई थी। लस्सी का दाम भी ज्यादा नहीं था बल्कि मात्र 20 रुपए था। सचिव द्विवेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि यहां पर एकत्रित हुआ सारा पैसा कंपनी द्वारा राज्य सरकार को सौंप दिया जाता है।

बिहार

बिहार के स्टॉल पर जनहित खबर टीम की मुलाकात राहुल गुप्ता से हुई। राहुल गुप्ता ने यहां पर एक शिल्पकार से परिचित कराया जिन्होंने काफी सारे पत्थरों को तराश कर अलग अलग रूप दिया था। यहां सभी चीजों के दाम समान्य से लेकर कुछ ज्यादा भी थे। यहां पर 50 रुपए से लेकर 1 हजार रुपए तक के दामों की मूर्तियां दिखाई दे रही थी। वही यह स्टॉल शिल्प अनुसंधान संस्थान द्वारा लगाया गया था।

हरियाणा

हरियाणा के स्टॉल पर जाने के बाद यहां पर हरियाणा की संस्कृति को दर्शाया गया था। यहां बताया गया कि हरियाणा को किस तरह से डिजिटल बनाया जा रहा है तथा डिजिटल होने तक के सफर को भी यहां पर अच्छे से प्रकाशित किया गया था। यहां पर योगेंद्र कोशिक ने जानकारी दी की किस प्रकार से हरियाणा सरकार यहां डिजिटल हरियाणा की तरफ आगे बढ़ रही है। यहां पर उन्होंने हरियाणा सरकार द्वारा चलाई जा रही कई सारी स्कीमों तथा योजनाओं के बारे में कई प्रकार की जानकारी साझा की।

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