‘मकोका’ की तर्ज पर ‘यूपीकोका’, क्या खत्म होगा सूबे से अपराध ?

यूपी में अब मकोका के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है. योगी कैबिनेट की बैठक में इस को मंजूरी दी गई. शीतकालीन सत्र में यूपीकोका विधेयक योगी सरकार लेकर आएगी. यह कानून योगी सरकार सूबे से आतंकवाद, अपराध, माफिया को खत्म करने के लिए लेकर आने वाली है. देखने वाली बात यह है कि सूबे में सत्ता बनने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ लगातार अपराध पर सख्ताई बरत रहे हैं. ऐसे में उन्होंने सूबे में से अपराध को खत्म करने का आदेश दिया था. जिसके बाद तत्कालीन गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्र की तरफ से दिल्ली, मुंबई और बिहार समेत कई राज्यों के बनाए गए कानूनों के बारे में जानकारी जुटाई गई थी.

जानकारी है कि सभी राज्यों के कानून के आधार पर ही यूपीकोका की तैयारी हो रही है. जिसके तहत 3 साल की सजा और उम्रकैद भी हो सकती है. यहां तक कि इस कानून के तहत फांसी की सजा भी है. इसके अलावा इस कानून में 25 लाख रुपए तक का जुर्माना भी है. किसी भी अपराधी पर यूपीकोका कानून कमिश्नर और आईजी की परमिशन मिलने के बाद ही लगाया जा सकता है. इस मामले में सुनवाई के लिए भी विशेष अदालत बनाई जाएगी. यूपी कोका कानून आने के बाद नेताओं के नेक्सस पर लगाम लगाई जाएगी. स्पेशल फोर्स और पुलिस को इसके तहत कुछ खास शक्तियां दी जाएंगी.

किसी भी व्यक्ति पर अगर यह कानून लग जाता है तो उसके लिए यह काफी घातक सिद्ध हो सकता है. क्योंकि यह कानून लगने के बाद आरोपियों को जल्दी से जमानत नहीं दी जाती है. इसके तहत पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने के लिए 180 दिन का समय भी मिल जाता है. लेकिन अगर IPC के प्रावधानों की बात की जाए तो यह सिर्फ 60 से 90 दिनों के लिए होता है. इस कानून के तहत आरोपी को 30 दिन की रिमांड पर भी भेजा जा सकता है जबकि दूसरी तरफ IPC प्रावधानों के लिए आज पर यह 15 दिन का होता है.

किसी भी आरोपी के खिलाफ अगर यह कानून लगाना है तो पुलिस को पहले एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस से मंजूरी लेनी पड़ती है. किसी आरोपी के खिलाफ 10 सालों में कम से कम 2 संगठित अपराधों में नाम दर्ज होगा तभी यह कानून उस पर लगेगा. संगठित अपराध में कम से कम 2 लोग शामिल होने चाहिए. इस कानून के तहत अधिकतम सजा फांसी की सुनाई जाती है और सबसे कम सजा 5 साल की होती है.

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