मेरठ: पेपर हुआ लीक

सीसीएसयू से संबद्ध मेडिकल कॉलेज में जारी एमबीबीएस की परीक्षाओं का कथित पेपर रविवार देर रात सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. मार्केट में चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के नाम पर एमबीबीएस का यह पेपर बेचा गय. बीती देर रात तक यह पेपर सभी तक पहुंच गया. दावा है की अभी तक हुए सभी पेपर पहले ही आउट हो चुके थे. पेपर आउट कराने के लिए दस-दस छात्रों का समूह बनाया गया. जिसे ग्रीन कार्ड का नाम दिया गया, यूनिवर्सिटी ने आज के दोनों पालियों में प्रस्तावित पेपर को स्थगित कर दिऐ हैं.

यूनिवर्सिटी में इस वक्त चार केंद्रों पर एमबीबीएस परीक्षाएं चल रही हैं. पेपर सुबह दस से एक बजे और दो से पांच बजे की पालियों में हैं. सभी केंद्रों पर इस वक्त पेपर उपलब्ध हैं. रविवार रात 11 बजे आज दस से एक बजे की पाली में प्रस्तावित एमबीबीएस थर्ड प्रोफेशनल पार्ट सेकेंड में सर्जरी द्वितीय कोड 404 का पेपर वाट्सएप ग्रुप पर वायरल हुआ. इसके बाद दावा है किया जा रहा है की वही पेपर है जो आज दस बजे से होना था. इसके प्रशन पेपर दो भागों में थे. जो पेपर वाट्सएप ग्रुप पर वायरल हुआ है वह यूनिवर्सिटी के नाम पर सभी मेडिकल कॉलेजों के छात्रों के पास रात में ही उपलब्ध हो गया था. छात्रों का आरोप है की इससे पहले के भी सभी पेपर सोशल मीडिया पर उपलब्ध थे.

यूनिवर्सिटी ने रात 12 बजे एमबीबीएस के नाम पर वायरल हुए इस पेपर के बाद आज की दोनों पालियों के पेपर स्थगित करने की घोषणा कर दी. वीसी एनके तनेजा के अनुसार पेपर आउट होने की कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ऐहतियाती तौर पर आज दोनों पालियों में होने वाले सभी पेपर स्थगित कर दिए गए हैं. यूनिवर्सिटी कथित तौर पर वायरल पेपर की जांच कराएगी.

विश्वविद्यालय के नाम पर देर रात बेचे गए एमबीबीएस का यह पेपर असली है या फर्जी इसका खुलासा जांच के बाद होगा, लेकिन संभव है की एमबीबीएस की आड़ में यूनिवर्सिटी के नाम पर किसी बड़े गिरोह ने फर्जी पेपर वायरल कर करोड़ों रुपये कमा लिए हैं. कथित रूप से आउट पेपर के कनेक्शन मुजफ्फरनगर और मोदीनगर से जुड़ रहे हैं, फिलहाल मामले को लेकर हड़कंप मचा हुआ है.

छात्रों के मुताबिक एमबीबीएस फाइनल के पेपर आउट कराने पर सर्वाधिक काम हुआ. इसके लिए सभी कॉलेजों में दस-दस सक्रिय छात्रों का एक ग्रुप तैयार किया गया. इसे ग्रीन कार्ड का नाम दिया गया. हर छात्र से चार-चार लाख रुपये इस एवज में लिए गए. यानी एक पेपर आउट कराने के नाम पर 40 लाख रुपये का खेल हुआ. यहां तक की ग्रीन कार्ड के नाम पर पेपर को आगे बेचने की छूट दी गई. इस ग्रुप ने विश्वविद्यालय के नाम पर बाकी छात्रों को यह पेपर 10 से 50 हजार रुपये में बेचा.

उधर इस मुद्दे पर जब हमने वीसी एनके तनेजा से बात की तो उनका कहना है की कथिक तौर पर पेपर लीक हुआ है. इसके लिए एक कमेटी बनाई जाएगी, और जांच की जाएगी. इस मामले में छात्रों ने वीसी का घेराव किया और वीसी को 24 घंटे में इसके आरोपियों के नाम सार्वजनिक करने और कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है, लेकिन वीसी इस मुद्दे पर काफी संवेदनशील दिखाई दिए.

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