एक के बाद एक कत्ल से घबराता मेरठ

कत्ल, लूट, रंगदारी, बलात्कार..संगीन अपराधों में पीड़ित को इंसाफ देना, कानूनी लड़ाई में पीड़ित को संरक्षण देकर उसे इंसाफ की मंजिल तक पहुंचाना पुलिस की जिम्मेदारी है. मेरठ में अब अपनों के कत्ल के गवाह कुख्यात बदमाशों के निशाने पर है. बीती 24 जनवरी को यूपी के डीजीपी ने जैसे ही कुर्सी संभाली, मेरठ के कुख्यात विकास जाट ने अपने साथियों के साथ सोहरका गांव में मां-बेटे का कत्ल कर डाला. मां निछेन्दर कौर अपने पति नरेन्द्र की हत्या की चश्मदीद और पैरोकार थी. 25 जनवरी को कत्ल केस में गवाही होनी थी, लेकिन उससे पहले ही मां बेटे को मौत के घाट उतार दिया गया.

मेरठ की सावित्री ने भी अपने ऊपर हुए हमले से 3 दिन पहले एसएसपी से मिलकर सुरक्षा मांगी थी. सावित्री अपने बेटे के कत्ल में गवाह थी. दूसरा गवाह उसका दूसरा बेटा भी था. अस्पताल में कई दिनों तक जिंदगी से जुझती सावित्री की मौत हो गयी. कचहरी में गवाही देने गए सावित्री के बेटे और रिश्तेदारों को कुख्यात अमित जाट ने कत्ल करने की धमकी पुलिस के सामने ही दी, लेकिन कुछ न हो सका. सावित्री के दामाद बबलू को भी आज मार दिया गया. बबलू अपनी सास और साले के कत्ल के मामले में पैरोकारी कर रहा था.

आपको ताज्जुब होगा की ऐसे हालात में पुलिस क्या कर रही है. सोहरका मामले में पुलिस की कार्यशैली यह थी की हत्या जैसे संगीन मामले में गवाहों को लगातार धमकियां मिल रही थी. गवाह सुरक्षा मांग रहे थे, लेकिन थानेदार और कोर्ट पैरोकार ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की.

सावित्री देवी के मामले में अफसरों ने उन्हे कत्ल के तीन दिन पहले सुरक्षा दी, लेकिन सावित्री के पास पहुंचा मगर बीमारी का बहाना बनाकर लौट आया. नतीजतन, सावित्री को कत्ल कर डाला गया और आज उनके दामाद को भी मार डाला गया. सावित्री के दामाद बबलू ने सरधना थानेदार से सुरक्षा मांगी थी, लेकिन थानेदार साहब ने उसे दुत्कार दिया. दूसरी ओर इंसाफ की आस लिए ही मर गया.

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