मेरठ: वंदे मातरम् पर राजनीति गरमाई

मेरठ में नगर निगम के बोर्ड का गठन अभी हुआ भी नहीं है और ऐसे में वंदे मातरम् के विवाद को लेकर सदन में दो फाड़ होने के आसार बन गए हैं. माना जा रहा है कि वंदे मातरम् कराने को लेकर पहले दिन ही सदन में हंगामा होना तय है. क्योंकि एक तरफ भाजपा के नवनिर्वाचित पार्षद वंदे मातरम् करवाने पर अड़े हैं तो वहीं बसपा के टिकट पर चुनकर आई नवनिर्वाचित महापौर सुनीता वर्मा ने वंदे मातरम् को सदन में ना करवाने का ऐलान कर दिया है.

vande matram

वंदे मातरम् देश का राष्ट्रगीत है लेकिन इन दिनों राजनीति का केंद्र बना हुआ है. खासतौर पर बात करें मेरठ की तो मेरठ में नगर निगम की राजनीति वंदे मातरम् के इर्द-गिर्द ही होती है. बात करें अगर पिछले मेयर कार्यकाल की तो पूरे पांच साल वंदे मातरम् को लेकर विवाद बना रहा है. हालांकि पिछले कार्य काल में मेयर भाजपा के थे तो उन्होंने भरे सदन में वंदे मातरम् से ही सदन शुरू करने का प्रस्ताव ध्वनिमत से पास करा लिया था. इससे बोर्ड की कार्रवाई में भी शामिल कर दिया गया. जिसके बाद से सदन की बैठक में वंदे मातरम् होता रहा लेकिन एक समुदाय से ताल्लुक रखने वाले पार्षद वंदे मातरम् के दौरान सदन से बाहर चले जाते थे और फिर जब वंदे मातरम् खत्म हो जाता था तो सदन में वापस आ जाते थे. वंदे मातरम के अपमान को रोकने के लिए भाजपा मेयर और पार्षदों ने इसे सदन की कार्यवाही में शामिल किया. जिसके बाद अब नवनिर्वाचित पार्षदों का भी कहना है जब हमेशा से वंदे मातरम् नगर निगम की कार्रवाई शुरु करने से पहले होता रहा है तो अब भी होगा.

वही बसपा के टिकट से पूर्व विधायक योगेश वर्मा की पत्नी इस बार महापौर के पद के लिए निर्वाचित हुई है. जनता ने उन्हें भारी मतों से जिताकर सदन में भेजा है. जिसके बाद उन्होंने अपनी जीत के फैक्टर यानि दलित और मुस्लिम का ध्यान रखते हुए राजनीति शुरू कर दी है . उन्होंने नगर निगम में सबसे पहले वंदे मातरम् को मुद्दा बनाया. उन्होंने साफ कर दिया कि निगम की कारवाई के अनुसार ही किसी भी चीज का अनुपालन किया जाएगा. हालांकि उनके पति ने कहा कि वंदे मातरम् निगम की कार्रवाई में शामिल नहीं है इसलिए वंदे मातरम् का गायन नहीं किया जाएगा. सदन में वंदे मातरम् होगा या नहीं यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन शहर का विकास करने वाले नेता शायद वंदे मातरम् की राजनीति में फसकर ही रहे गए है. नेताओं की राजनीति का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ेगा.

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