चीनी मिल बंद होने के बाद कर्मचारियों का प्रदर्शन

सहकारी चीनी मिल सितारगंज के पीपी मोड़ पर आने से परेशान होकर अखिल भारतीय किसान सभा के दर्जनों किसानों व चीनी मिल के सैकड़ों कर्मचारियों के द्वारा संयुक्त रूप से तहसील में पहुंच किया गया विरोध प्रदर्शन व धरना दिया गया धरना. चीनी मिल चलाने को लेकर तहसीलदार को ज्ञापन भी सौंपा गया. किसानों का कहना है कि चीनी मिल को चलाया जाए जिससे खेतों में खड़ा गन्ना लिया जा सके. चीनी मिल कर्मचारियों ने कहा कि चीनी मिल की रिपेरिंग के बाद भी क्यों इसे बंद करने का आदेश दिया गया है. धरना दे रहे लोगों ने सरकार को चेताया कि चीनी मिल नही चलाई गई तो उनका विरोध प्रदर्शन और भी ज्यादा उग्र हो जाएगा.

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सहकारी चीनी मिल सितारगंज को 2 करोड़ लगाकर रिपेयर करने के बाद पूरी तरह चीनी मिल को चलाने की तैयारी के बाद एक दम उत्तराखंड की कैबिनेट में पीपी मोड़ में लाने पर क्षेत्र के किसान व चीनी मिल कर्मचारी पूरी तरह से भड़क उठे हैं. अखिल भारतीय किसान सभा कहना था कि किसानों की गन्ने की फसल तैयार है लेकिन अब ऐसा क्या हो गया है कि 2 करोड़ चीनी मिल की रिपेरिग में लगाने के बाद भी चीनी मिल सरकार बंद करके किसानों की फसल बर्बाद करने में तुली है. किसानों ने चेतावनी दी कि अगर चीनी मिल नही चलाई गई तो किसान उग्रअन्दोलन करेंगे। जिसकी पूरी जिमेदारी उत्तराखंड सरकार की होगी.

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वही चीनी मिल कर्मचारियों के संगठन का कहना था कि जब चीनी मिल चलाने की तैयारी पूरी हो चुकी थी तो चीनी मिल के महाप्रबंधक ने उत्तराखंड सरकार से 56 करोड़ रुपये की क्यों मांग कर रहा था जिस कारण प्रदेश सरकार ने चीनी मिल को बंद करने के आदेश दे दिए. जबकि सरकार से पैसे लेने की जरूरत ही नहीं थी. मिल के चलते ही चीनी पर बैंक रुपये दे देता और उससे कर्मचारियों का वेतन निकल जाता. जबकि महा प्रबंधक द्वारा ऐसा नहीं किया गया इसके पीछे उनकी क्या मंशा थी हमे बताए.

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