मसूरी के लिये कलाकार का दर्द

मशहूर लोक गायिका रेश्मा शाह ने मसूरी में पत्रकारों से वार्ता करते हुए मसूरी की बिगडते हालत और लगातार हो रहे निर्माणों को लेकर अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि पहाडों की रानी मसूरी हल्के हल्के अपने स्वरूप को खोता जा रहा है. उन्होंने बताया कि 20 साल पहले वह मसूरी आई थी और यहां की खूबसूरती और स्वच्छ वातावरण से अभिभूत होकर यही की होकर रह गई थी.

परन्तु आज के स्वरूप् को देखकर वह बहुत दुखी है जहां देखो हरे भरे जगलों और पेडों का कटान कर बडे बडे निर्माण किये जा रहे है, जो चिंता का विषय हैं. उन्होंने सरकार से मांग की वह मसूरी को बचाये रखने के लिये ठोस कदम उठाये जिससे पहाडों की रानी का बचाया जा सके. वहीं इस मौके पर उन्होंने बताया कि उनके द्वारा हाल में गाये गए गाने यूटयूब में काफी पंसद किये जा रहे है, जिसको सूनने वालो की संख्या लाखो में हो चुकी है. वह जल्द मसूरी को लेकर भी एक गीत लिख रही है, जिसको जल्द प्रषंसको को समर्पित किया जायेगा.

रेश्मा शाह ने बताया कि उनके द्वारा विदेशों में भी कई कार्यक्रमों में प्रफोम किया है और वहां लोगो के द्वारा अपने उत्तराखण्ड और देश की संस्कृति के प्रति लगाव देखकर वह काफी हैरान है और ऐसे में सरकार को भी अपने सस्कृति और वेशभूषा को प्रोत्साहित करने के लिये ठोस कदम उठाने चाहिये. वहीं क्षेत्रीय कलाकरों को भी विदेश भेजने को लेकर विशेष छूट दी जानी चाहिय. इस मौके पर समाजिक कार्यकर्ता महीमानंद, पूर्व छात्र संध अध्यक्ष आशीष जोशी, विजय विंदवाल मौजूद थे.

जनहित के लिए सुनील सोनकर की रिपोर्ट

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here