”जीवन का ज्ञान श्रीमद्भागवत कथा से ही प्रकट होता है”- व्यास आचार्य

जीवन का ज्ञान श्रीमद्भागवत कथा से ही प्रकट होता है उन्होंने मन को बंधन और मुक्ति दोनों का कारण बताया और कहा कि मन को वश में करके इसे परमात्मा से जोड़ना ही जीवन का सार हैं. यह बात राधे-राधे सेवा समिति लालकुआं के तत्वाधान में आयोजित की जा रही श्रीमद्भागवत कथा के अवसर पर कथा व्यास आचार्य डॉ पंकज मिश्र ‘मयंक’ ने कही.


भागवत कथा का श्रवण, मनन व पालन समस्त दु:खों का अंत है जो जीवन को मर्यादित रहने की प्रेरणा देता है. अपनी सुधामय वाणी की धार से भक्तों पर अमृत वर्षा करते हुए उन्होंने आगे कहा मनुष्य काम, क्रोध, मद व लोभ के वशीभूत होकर प्रभु से दूर होता चला जाता है और जीवन भर उसका पीछा नहीं छोड़ती है जबकि अगर जीवन की व्यथा को दूर करना हो तो भागवत कथा का श्रवण कर प्रभु के चरणों में अनुराग करना चाहिए. यही जीवन की सार्थकता है.

यहाँ आयोजित की जा रही भागवत कथा को प्रारंभ करते हुए कथा व्यास डॉक्टर पंकज मिश्र ‘मयंक’ ने गोपी चीर हरण की लीला का व्याख्यान किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि ब्रह्मजीव जब आडंबर अलग कर एक हो जाते हैं, तभी गोवर्धन पूजा होती हैं. यहां भगवान ने दो स्वरूप बनाए एक पूज्य पूजक और दूसरे ब्रजमंडल बने. यहां भगवान श्री कृष्ण ने लोगों के अंदर के अहंकार को खत्म किया साथ ही इंद्र का अहंकार भी समाप्त किया. इस दौरान सैकड़ों की संख्या में श्रोतागण मौजूद रहे जिसमें भारी संख्या में महिला श्रद्धालु मौजूद रहीं.

भागवत कथा में मुख्य रूप से पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल, समिति अध्यक्ष संजीव शर्मा, कोषाध्यक्ष जीवन कबडवाल, भुवन पांडेय, उमेश तिवारी, हरीश नैनवाल, पंडित वी एन दुबे, भोलाराम, मीडिया प्रभारी शैलेंद्र सिंह, ओ पी अग्निहोत्री, रोहित सिंह, अमित मिश्रा, बी एन शर्मा, कुलदीप मिश्रा, डी एन सुयाल, अनिल शर्मा, गणेश मिश्रा, पंकज दीक्षित, अनिरुद्ध यादव, सुबोध दीक्षित, ओमपाल कश्यप, पंकज बत्रा, राधेश्याम यादव, प्रदीप मौर्य, रामेश शर्मा, जय शंकर, छोटे लाल कश्यप, लाल सिंह, महेश कश्यप, विकास गुप्ता, पंचमलाल, शैलेंद्र राठौड़, महेंद्र पाल, मिंटू, पप्पू गौतम, सौरभ कुमार, मन्तोष बाला, धर्मेंद्र सहित तमाम क्षेत्रवासी व श्रद्धालू मौजूद रहे.

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