”बहेड़ी चीनी मिल को नही देंगें गन्ना”

सितारगंज के नकुलिया गांव के गन्ना किसानों ने सितारगंज गन्ना समिति द्वारा लगाए गए काटे पर पहुंचकर प्रदर्शन किया. गन्ना किसानों का कहना है कि सितारगंज चिनीमिल सरकार द्वारा बंद किये जाने के बाद मिल द्वारा लगाए गए कांटे को बहेड यूपी की चिनीमिल से जोड़ा गया है. लेकिन वह बहेड चिनीमिल को अपना गन्ना नही देंगें किच्छा चिनीमिल में उनके खाते है इसलिए उनके कांटे को किच्छा चिनीमिल से जोड़ा जाए अगर ऐसा नही होता तो वह सरकार के खिलाफ आंदोलन करेंगे.

इस से पहले सितारगंज में भी हुआ कुछ ऐसा ही-

सितारगंज क्षेत्र के किसानों का सोमवार से गन्ना सोसाइटी सितारगंज में चीनी मिल पीपी मोड़ पर देने को लेकर सरकार के खिलाफ क्रमिक अनशन जारी. चीनी मिल बंद होने के कारण सैकड़ों किसानों का गन्ना खेतो में खड़ा होने पर फूटा गुस्सा हाथो में गन्ना लेकर नगर में रैली निकली. सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. प्रदेश सरकार के खिलाफ की जमकर नारेबाजी कि और मुख्यमंत्री को संबोधित तहसीलदार को सौपा ज्ञापन.

‘दि किसान सहकारी चीनी मिल’ सितारगंज को चलाने के लिए 1 करोड़ 70 लाख रुपये लगाकर मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया था. 9 नवम्बर को चीनी मिल चलाने का समय तय हो गया था सारी तैयारियां पूरी कर ली गयीं थी। किसानों के गन्ने तोलने के लिए जगह-जगह सेंटर बना काटे लगा दिए गए थे. कर्मचारियों को डियूटी पर बुला लिया गया था. किसानों के गन्ने की फसल खेतो में तैयार हो चुकी हैं. अब चीनी मिल के मजदूरों को भी एकदम बेरोजगार कर दिया गया. वहीं किसान गन्ना कहा लेकर जाए. जिसपर चीनी मिल के मजदूर व किसान दोनों के चूल्हों पर सरकार ने पानी फेर दिया. जिसको लेकर किसान व चीनी मिल के मजदूर दोनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और रोजाना ही धरने प्रदर्शन होने लगें. लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नही रेंग रही हैं. अब किसानों व चीनी मिल मजदूरों की एक ही मांग हैं कि चीनी चलाओ नहीं तो हम सरकार का पुरजोर विरोध करेंगे.

जनहित खबर के लिए चरन सिंह की रिपोर्ट

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