मसूरी में पेयजल का संकट

पहाड़ों की रानी मसूरी के नजदीक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल धनोल्टी में आए दिन जल संस्थान की लापरवाही के कारण लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ता है. गत एक सप्ताह से धनोल्टी और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल आर्पूति ठप्प होने के कारण स्थानीय लोगों सहित सैलानियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. जिसका खामियाजा स्थानीय व्यवसायकों को भुगतना पड़ रहा है. पेयजल ना मिलने से पर्यटक धनोल्टी से वापसी का रूख कर रहे है. मुख्य पर्यटक स्थल धनोल्टी में हिमपात के भड़ते ही पेयजल आपूर्ति ठप्प हो गई है. जिस कारण स्थानीय लोगों के साथ ही हिमपात देखने धनोल्टी पहुंचे पर्यटकों को पेयजल की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों की माने तो कई बार जलसंस्थान को मौखिक एंव लिखित शिकायत दी गई है, लेकिन विभाग है कि इस दिशा में सुन्ने को तैयार ही नहीं है. जिससे लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है. पेयजल आपूर्ति ठप्प होने कें कारण स्थानीय लोग कई किलोमीटर पैदल बर्फ में चलकर प्राकृतिक श्रोतों से पीने का पानी ला रहे है. जबकि पानी की सप्लाई ना होने से होटलो में सैलानियों को रूकवा पाना मुश्किल हो गया है. जिसके चलते हिमपात की सीजन में भी धनोल्टी के होटल खाली पडे़ हुए है और सैलानी धनोल्टी से वापस मसूरी देहरादून का रूख कर रहे है. साथ ही स्थानीय व्यवसाय जलसंस्थान की करनी पर आंसू बहा रहे है.

स्थानीय लोगों का कहना है की आए दिन हिमपात को देख कर बड़ी तादात में पर्यटक धनोल्टी आ तो रहे है लेकिन पेयजल आपूर्ति ठप्प होने से पर्यटक रूकने का नाम नही ले रहे है. स्थानीय होटल व्यवसायकों ने टैंकरों से पानी लाने की कोशिश भी की है लेकिन बर्फ के उपर पडे़ पाला से फिसलन काफी बढ गई है, जिस कारण इस फिसलन में कोई वाहन चालक भी हाथ डालने को तैयार नहीं है. पाले के कारण श्रोतों से भी पानी पहुंचाना मुश्किल हो गया है. लेकिन जल संस्थान इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है. जहां एक तरफ लोगों को हिमपाती सीजन में दो बक्त की कमाई का टोटा पड़ गया. वहीं स्थानीय लोगों को पीने के पानी से जूझना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है यदि विभाग इस ओर ध्यान नहीं देता तो लोग तहसील परिसर में धरना प्रदर्शन करने को मजबूर हो जाऐंगे.

आपको बता दें कि धनोल्टी में ही उपजिलाधिकारी कार्यालय है और तहसील मुख्यालय भी है इसके बावत भी 6 दिनों से पेयजल के लिए जूझते लोगों की सुनवाई नहीं हो रही है. आखिर धनोल्टी प्रशासन पर भी सवाल उठने लाजिमी है की प्रशासन भी जल संस्थान की अनदेखी पर क्यों आंखें बंन्द किए बैठा है.

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