इस मंदिर में गाई जाती है मुस्लिम के हाथ से लिखी गई आरती

आपको इस खबर को पढ़कर शायद यकीन नहीं होगा लेकिन भगवान विष्णु के धाम में एक मुस्लिम व्यक्ति के द्वारा लिखी गई। आरती को सुबह-शाम गाई जाती है और भगवान भी इस आरती से प्रसन्न होते है। हिंदू धर्म में बहुत सदियों से पहले यह प्रथा चली आ रही है कि मंदिर में सिर्फ ब्राह्मण व्यक्ति ही पूजा कर सकते हैं और वही पूजा के लिए जितने भी ग्रंथ लिखे गए हैं वह भी ब्राह्मणों द्वारा ही लिखे गए हैं। वही भारत में एक मंदिर ऐसा भी है, जहां पर एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा लिखी गई आरती को सुबह शाम मंदिर में गाया जाता है।

badrinath

हम आपको बताते हैं कि भगवान बद्रीनाथ को हिंदू का तीर्थ मान जाता है और उनकी पूजा सिर्फ ब्राह्मण ही करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है बद्री विशाल की आरती को किसने लिखा है? डेढ़ सौ साल से कपाट खुलने से बंद होने तक मंदिर में हर सुबह शाम आरती की जाती है। जिसे एक मुस्लिम शायार ने लिखा थी। वह शायार चमोली जिले के नंदप्रयाग निवासी फकरुद्दीन थे। फकरुद्दीन ने आरती को सन् 1865 में लिखा था। जब से आरती लिखी गई तब से इस आरती को बद्री विशाल की पूजा में गाया जाता है। जब आरती को फकरुद्दीन ने लिखा था। उस वक्त उनकी आयु सिर्फ 18 वर्ष थी। इस आरती में बद्रीनाथ धाम के सभी धार्मिक महत्व और यहां की सुंदरता के बारे में लिखा गया है।

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