महाराष्ट्र हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने किया बंद वापस लेने का फैसाला

नए साल पर शुरू हुआ महाराष्ट्र में जातीय संघर्ष अब खत्म हो चुका है. भीमा कोरेगांव की 200वीं वर्षगांठ में आयोजित एक कार्यक्रम में दो गुटों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी. जिसके बाद महाराष्ट्र में पिछले 3 दिनों से काफी हिंसक माहौल था. बी आर अंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर ने बंद को वापस लेने का फैसला किया है. इस बंद के चलते आम लोगों को काफी दिक्कत हुई. पूरे मुंबई में जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया. प्रदर्शनकारियों ने चेंबूर घाटकोपर कामराज नगर विक्रोली कांदिवली जोगेश्वरी काला नगर माहिम में प्रदर्शन किए थे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे को रोकने की कोशिश की थी लेकिन पुलिस ने उन्हें वहां से खदेड़ दिया.

महाराष्ट्र के पुणे से शुरु हुई हिंसा समूचे महाराष्ट्र राज्य को प्रभावित कर रही है. दो दिन पहले भीमा कोरेगांव में हिंसा का उदय हुआ और बीते दो दिनो से ही पूरे राज्य में जनजीवन को अस्तव्यस्त करके रख दिया है. हिंसा को बढ़ता देख राज्य के मुख्यमंत्री और अन्य राज्य नेताओं ने हिंसा की जांच और इस मामले में कारवाई करने के आदेश तत्काल दे दिए है. यह हिंसा एक जनवरी को पुणे के भीमा कोरेगांव में दलित समाजके शौर्य दिवस पर भड़की थी जिसके विरोध में बीआर अम्बेडकर के पोते और कुछ कार्यकर्ताओं ने बुधवार को महाराष्ट्र बंद करने का एलान किया है.

जातीय हिंसा के चलते मुंबई में बुधवार को सभी स्कूलों, बसों के सेवा को बंद कर दिया गया है. स्कूलों के मालिकों का कहना है की हम अपने बच्चों के भविष्य से किसी भी प्रकार का रिस्क नहीं लिया जा सकता है. हम बुधवार दोपहर को राज्य के हालातों को देखते हुए यह फैसला लेंगे की दूसरी पीरीयड में बस को चलाया जा सकता है या नहीं. कुछ स्कूलों के शिक्षकों ने बताया है की हमने बच्चों के अभिवावकों पर छोड़ दिया है की वह अपने बच्चों को स्कूल भेजना चाहते है या फिर नहीं. बुधवार के दिन देखा गया की स्कूलों में मात्र 50 बच्चे ही स्कूल आए है ऐसे में हमने उन बच्चों को भी उनके घर भेज दिया है. इस बढ़ती हिंसा ने बहुत सी लोकल ट्रेंनों और बसों पर भी इसका असर पड़ा है.

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