संविदा नियुक्तिया शोषण का एक जीता जागता उदाहरण

सब मांगे मान लूंगा, हड़ताल खत्म करके मेरे पास आओ,

संविदा नियुक्ति शोषण का उदाहरण है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को 8 अप्रैल को भी दे सकते हैं कुछ लॉलीपॉप. यूं तो मध्यप्रदेश में अभी चुनाव लगभग 8 महीने दूर हैं, लेकिन सत्ता के स्वार्थ में वशीभूत राजनेता अभी से ही अपनी सियासी शतरंज की बिसात पर चालें चलना शुरू कर दिए हैं. इसी कड़ी में मध्यप्रदेश की राजनीतिक वर्चस्व की इस लड़ाई में कांग्रेस और भाजपा कोई भी रिस्क लेने को अब तैयार नहीं दिखाई पड़ती हैं. एंटी इनकंबेंसी के साथ ही प्रदेश के किसान, बेरोजगार, व्यापारी, अध्यापक, प्रशासनिक अधिकारियों, सरपंच सचिव, आंगनवाडी सहायिकाओं, कार्यकर्ताओं के साथ ही स्वास्थ्य संविदा कर्मियों का तगड़ा विरोध झेलने के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बड़ी घबराहट की स्थिति में दिखाई दे रहे हैं. अपनी 15 वर्षों पुरानी सत्ता की कुर्सी की हिलती चूले देख प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान नैतिक और अनैतिक कदम उठाने पर बेबस से दिखाई दे रहे हैं. यही वजह है कि आज बीते कई दिनों से आंदोलित स्वास्थ्य संविदा कर्मियों को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने हड़ताल समाप्त कर समस्त मांगे मान लेने का खुला आमंत्रण दे दिया गया है.

सत्ता को पुन हासिल करने की उच्च महत्वकांक्षा के फलीभूत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का यह निर्णय प्रदेश में उनकी राजनीतिक सत्ता की हवस को भी प्रदर्शित कर रहा है. गौरतलब है कि आगामी 2 अप्रैल से दो दिवसीय सामूहिक हड़ताल पर जा रहा महिला एवं बाल विकास परियोजना का पूरा अमला को भी अब साधने की तैयारी मुख्यमंत्री के द्वारा की जा रही है. ऐसा माना जा रहा है कि आगामी 8 अप्रैल को आहूत सम्मेलन में इस वर्ग के लिए मुख्यमंत्री बड़ी रियायतों की घोषणा कर सकते हैं. वहीं राजनीतिक प्रेक्षकों का यह मानना है कि भाजपा में सत्ता खोने का डर जमकर सता रहा है. पहले से ही आकंठ कर्ज में डूबी मध्यप्रदेश सरकार का खाली खजाना लुटाने की योजना मध्य प्रदेश के अहित में है.

भाजपा सरकार ने किया संविदाकर्मियों का शोषण, मुख्यमंत्री की स्वीकारोक्ति.
बीते कई दिनों से स्वास्थ्य संविदा कर्मियों के आंदोलन से मुख्यमंत्री घबराए हुए से दिखाई दे रहे हैं. आज दिए गए उनके बयान से यह सिद्ध हो गया कि बीते 15 वर्षों से वह प्रदेश के संविदा कर्मियों का शोषण कर रहे थे. अपने ताजे बयान में शिवराज सिंह ने यह मान लिया है कि संविदा शोषण की एक व्यवस्था होती है. मुख्यमंत्री की यह स्वीकारोक्ति स्वत ही सिद्ध कर रही है कि भाजपा ने बीते 15 वर्षों से संविदा आधारित की गई नियुक्तियों में प्रदेश के कर्मचारियों का जमकर शोषण किया है. अब चुनावी गणित के कारण उनके विनियमितीकरण के लिए सरकार मजबूरी में आत्मसमर्पण कर रही है, लेकिन देखना यह है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा दी जा रही यह लॉलीपॉप क्या इन संविदा कर्मी सहित अन्य वर्गों को कितना लुभा पाती है.

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