पंजाब सरकार का तानाशाही भरा फैसला

पंजाब सरकार द्वारा पूरे राज्य में 118 आयुर्वेदिक मेडिकल अधिकारियों की नियुक्ति की जानी थी। जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगाते हुए पंजाब सरकार और पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन पीपीएस को 13 दिसंबर के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह रोक जस्टिस जी.चौधरी ने पटियाला के प्रभजीत सिंह सहित छह अन्य एडवोकेट, एचसी अरोड़ा के जरिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए लगाई है।

punjab and haryana highcourt

याचिका कर्ता ने दायर याचिका में कोर्ट को बताया है कि पीपीएससी ने आयुर्वेदिक मेडिकल अधिकारियों के 118 पदों पर नियुक्ति के लिए 28 अक्टूबर को लिखित परीक्षा ली थी। इस परीक्षा से पहले अब तक हर बार इस परीक्षा का प्रश्न पत्र हिंदी और अंग्रेजी भाषा में आता था। लेकिन इस बार प्रश्न पत्र सिर्फ अंग्रेजी भाषा में आया इसके बारे में आयोग द्वारा कोई सूचना नहीं दी गई थी। प्रश्न पत्र में अंग्रेजी भाषा में ही सभी प्रश्न पूछे गए थे, जिसके चलते आवेदकों को उत्तर देने में बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। ऐसा करना ऐसा करने से पहले आयोग ने नहीं दी थी । हिंदी भाषा में कई प्रश्नों में विरोधाभास भी था 29 अक्टूबर को आयोग ने एक पब्लिक नोटिस जारी कर चेतावनी दी की आंसर की के खिलाफ जो भी आपत्ति दर्ज कर आएगा।
अगर उसकी आपत्ति गलत पाई गई तो उस परीक्षार्थी के तीन अंक काट लिए जाएंगे और साथ ही याचिकाकर्ता के अनुसार यह नोटिस पूरी तरह से गलत है और इस पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द कर के नए सिरे से दोनों भाषा दोनों भाषाओं में प्रश्न पत्र के जरिए परीक्षा ली जाएगें।

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