जानें कामसूत्र का इतिहास

कामसूत्रा एक प्राचीन कामशास्त्र ग्रंथ है. इस ग्रंथ को महार्षि वात्स्यायन द्वारा लिखा गया था. कामसूत्र ग्रंथ को अपने विभिन्न आसनों की वजह से ही इतिहास से वर्तमान तक की पहचान मिली है. माहर्षि वात्स्यायन द्वारा लिखा गया कामसूत्र ग्रंथ पूरे विश्व की पहली यौन संहिता है, जिसमें यौन प्रेम के मानोशारीरिक सिद्धान्तों और प्रयोग की व्याख्या सहित विवेचना भी की गई है. जो स्थान अर्थ के क्षेत्र में कौटिल्य के अर्थशास्त्र का है वही स्थान काम के क्षेत्र में कामसूत्र का है.

प्रमाण के आभाव में महर्षि का काल निर्धारण नहीं हो पाया है, लेकिन कई विद्वानों और शोधकर्ताओं के मुताबिक महर्षि ने अपने विश्वविख्यात ग्रंथ कामसूत्र की रचना ईसा की तृतीय शताब्दी के मध्य में की होने का अनुमान लगाया गया है.

कामसूत्र ग्रंथ में सिर्फ दाम्पत्य जीवन का श्रृंगार किया गया है वरना कला, शिल्पकला और साहित्य को भी संपादित किया गया है. इस ग्रंथ में कुछ दुर्लभयौन चित्रकारी दर्शाया गया है. राजस्थान की कुछ दुर्लभयौन चित्रकारी सहित खजुराहो, कोणार्क आदि जीवन्त शिल्पकला भी कामसूत्र से अनुप्रणित किया गया है. रचना की दृष्टि से कामसूत्र में कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र के समान है, चुस्त, गंभीर, अल्पकाय होने पर भी विपुल अर्थ से मंडित किया गया है. इन दोनों की शैली समान है. सूत्रात्मक,रचना के काल में भले अंतर है, अर्थशास्त्र मौर्यकाल का है और कामसूत्र गुप्तकाल का है.

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