18 लाख ना जमा कराने पर किया मां-बच्ची को मृत घोषित, परिजनों ने की अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की मांग

राजधानी दिल्ली से सटे फरीदाबाद में एक ऐसा मामला सामने आया जिस सुन कर आप चौंक जाएंगे. यहां निजी अस्पताल में एक गर्भवती महिला से को भर्ती कराया गया था लेकिन यहां पर इलाज के दौरान महिला और उसके बच्चे की मौत हो गई. लेकिन इसके बाद अस्पताल की तरफ से मृतका के परिजनों को 22 दिन का अस्पताल का बिल 18 लाख रुपए पकड़ा दिया. परिजनों का कहना है कि अस्पताल की तरफ से ना ही महिला को बचाया जा सका और ना ही उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को बचाया जा सका. अस्पताल की तरफ से कहा गया है कि इस बिल को परिजनों को जल्द से जल्द चुकाना होगा.

hospitals demands for 18 lakh

जानकारी है कि 22 दिन तक इलाज के दौरान 18 लाख रुपए से भी ज्यादा का बिल बनाया गया जिस मुद्दे पर अब परिजनों द्वारा अस्पताल पर जांच की मांग की जा रही है. अस्पताल का नाम एशियन हॉस्पिटल बताया जा रहा है. मृतका को बुखार के कारण भर्ती कराया गया था. परिजनों की तरफ से यह कहा जा रहा है कि अस्पताल में भर्ती कराने के 4 दिनों बाद उसके गर्भ में पल रही जान की मौत होने की बात कही गई जिसके बाद मां के ऑपरेशन करने की बाद कही गई. जिसे शुरु करने में डॉक्टरों की तरफ से साढ़े तीन लाख रुपए की मांग की गई. परिजनों का कहना है कि पूरा पैसा जमा करने के बाद ही डॉक्टरों ने ऑपरेशन शुरु किया.

जानकारी है कि डॉक्टरों द्वारा ऑपरेशन में देरी होने के कारण मृतका के पेट में इंफेक्शन हो गया था. हालात ज्यादा बेकाबू होने के कारण मृतका को आईसीयू में डाला गया था. लेकिन फिर भी अस्पताल द्वारा बार बार 18 लाख रुपए की मांग की जा रही थी. मृतका का नाम श्वेता है जिनके पिता सीताराम ने आरोप लगाते हुए कहा है कि अस्पताल में ना तो उसकी बेटी बच पाई और ना ही उसके पेट में पल रहे बच्चे को बचाया जा सका. सीताराम की तरफ से आरोप लगाया गया है कि जैसे ही उन्होंने पैसे जमा करने से मना किया तो उसके कुछ देर बाद श्वेता को मृत घोषित कर दिया गया. सीताराम की मांग है कि अस्पताल के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और इस पूरे मामले की सख्ती से जांच की जानी चाहिए.

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