मालदीव: राष्ट्रपति भेजना चाहते थे विशेष दूत लेकिन भारत ने कहा ”यह वक्त सही नहीं”

मालदीव में लोकतंत्र की स्थिति को लेकर आजकल चर्चाएं जोरों पर हैं. मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन अपने विदेश मंत्री को दूत के तौर पर भारत में भेजना चाहते थे, लेकिन उनके आने की तारीख भारत को सही नहीं लगी. इसका दावा मालदीव के राजदूत ने किया है. मालदीव में लोकतंत्र को लेकर भारत की चिंता पर मालद्वीव ने वास्तविक कार्रवाई नहीं की है. इस कड़ी में यामीन अपने दूतों को सऊदी चीन और पाकिस्तान भेज चुका है जिससे की उसे भारत की राजनीतिक संकट की जानकारी मिलती है.

मालदीव के राजदूत अहमद मोहम्मद की तरफ से यह कहा गया है की योजना के मुताबिक पहला पड़ाव भारत है और मालदीव के राष्ट्रपति के विशेष दूत को भेजने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन प्रस्तावित तारीखे भारतीय नेतृत्व को उचित नहीं लगी. राजदूत अहमद मोहम्मद ने कहा की वह समझते हैं की विदेश मंत्री देश से बाहर हैं और प्रधानमंत्री इस हफ्ते संयुक्त अरब अमीरात यूएई में जाने वाले हैं. सूत्रों के हवाले से खबर है की भारत को दूत की यात्रा के उद्देश्य के बारे में नहीं बताया. सूत्रों के हवाले से खबर है की मालदीव के दूत की यात्रा को भारत की ओर से नकारा गया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय तथा भारत की तरफ से जताई गई चिंताओं पर मालदीव की तरफ से कोई वास्तविक कार्रवाई नहीं की गई.

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