उमर अब्दुल्ला को नहीं समझ आया एनजीटी का आदेश

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पवित्र अमरनाथ गुफा को साइलेंस क्षेत्र घोषित कर एक निश्चित सीमा से आगे राम का नाम लेने और जयकारा लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया है. एनजीटी का यह फैसला जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को समझ नहीं आया है. अब्दुल्ला ने ट्वीट कर एनजीटी के इस फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब्दुल्ला ने अपने ट्वीट में लिखा है कि ‘मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि पवित्र अमरनाथ गुफा के बाहर तीर्थ यात्रियों के जप और जयकारों से पर्यावरण को कैसा नुकसान पहुंचेगा.’

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आपको बता दें कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एनजीटी ने धार्मिक स्थल अमरनाथ गुफा को शांत क्षेत्र घोषित कर एक निश्चित सीमा से आगे जप और जयकारों पर रोक लगा दी है. अमरनाथ श्राइन बोर्ड को इस आदेश का पालन करने का निर्देश देते हुए एनजीटी के प्रमुख जस्टिस स्वतंत्र कुमार की पीठ ने कहा है कि बोर्ड अमरनाथ गुफा के आसपास के क्षेत्रों में पर्याप्त सभी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराएगा और साथ ही साथ यह भी सुनिश्चित करेगा कि कोई भी दर्शनार्थी पवित्र शिवलिंग के दर्शन से वंचित ना रहे.

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एनजीटी ने लिंग के आगे लगी लोहे की ग्रिल को हटाने का आदेश दिया है, यह आदेश एनजीटी ने इसलिए दिया है ताकि सभी दर्शनार्थी हिमलिंग का बेहतर ढंग से दर्शन कर सकें. इसके साथ ही एनजीटी ने अंतिम तलाशी बिंदु से आगे किसी भी दर्शनार्थी को किसी भी प्रकार का निजी साजो सामान ले जाने से रोकने का आदेश दे दिया है. विहिप का कहना एनजीटी ने तुगलकी फतवा जारी किया है. विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि एनजीटी ने अमरनाथ मंदिर में जप और जयकारों पर रोक लगा कर तुगलकी फतवा जारी किया है. धरती पर प्राकृतिक संबंधित किसी भी घटना का जिम्मेदार हिंदू नहीं है.

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