त्रेता युग में मिला था अमर रहने का वरदान

 

1- हनुमान जी

अंजनी पुत्र हनुमान को त्रेता युग में अजर-अमर रहने का वरदान मिला हुआ है। रामायण काल में पवन पुत्र हनुमान भगवान राम के परम भक्त रहे थे। हजारों वर्षों बाद वे महाभारत काल में भी नजर आए थे। बता दें हनुमान जी अपने भक्तों की हर मनोकमाना पूरी करते हैं। जब अशोक वाटिका में हनुमान जी ने माता सीता को प्रभु श्री राम का संदेश सुनाया था तब माता सीता ने प्रसन्‍न होकर उन्‍हें अजर-अमर होने का वरदान दिया था।

2- विभीषण

बात अगर रामायण की होती है तो विभीषण का नाम भी कुछ देर बाद सुनने को मिलता है। विभीषण रावण का भाई था। शिव भक्त एवं राक्षस राजा रावण का छोटा भाई था विभीषण। रावण के भाई होने के बावजूद भी विभीषण श्रीराम के परम भक्त हैं। जब रावण ने माता सीता हरण किया था, तब विभीषण ने रावण को श्रीराम से शत्रुता न करने के लिए बहुत समझाया था। इस बात पर रावण ने विभीषण को लंका से निकाल दिया था। विभीषण श्रीराम की सेवा में चले गए और रावण के अधर्म को मिटाने में धर्म का साथ दिया। ये भी अमर माने जाते हैं।

3- परशुराम

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु के छठें अवतार हैं परशुराम। परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका थीं। माता रेणुका ने पांच पुत्रों को जन्म दिया। जिनके नाम वसुमान, वसुषेण, वसु, विश्वावसु तथा राम रखे गए। चिरंजीवी होने के कारण राम के काल में भी थे। परशुराम ने 21 बार पृथ्वी से समस्त क्षत्रिय राजाओं का अंत किया था। पौरोणिक वृत्तान्तों के अनुसार उनका जन्म भृगुश्रेष्ठ महर्षि जमदग्नि द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप पत्नी रेणुका के गर्भ से वैशाख शुक्ल तृतीया को हुआ था। वे भगवान विष्णु के आवेशावतार थे।

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