बसंत पंचमी के दिन ऐसे करें मां सरस्वती का पूजन

मनुष्य के लिए सबसे बड़ी चीज ज्ञान होती है. ज्ञान और वाणी के बिना विश्व की कल्पना करना भी असंभव है. मां सरस्वती ही ज्ञान और वाणी की देवी है. मनुष्य तो मां सरस्वती की पूजा अर्चना करता ही है उसी के साथ असुर भी मां सरस्वती की भक्ति भाव से पूजा करते हैं. वसंत पंचमी के शुभ दिन पर मां सरस्वती को पूजा जाता है. इस पावन दिन पर मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करके उनकी पूजा अर्चना करनी चाहिए. कई तीर्थ स्थलों पर पूजा समितियों द्वारा वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का भव्य आयोजन किया जाता है. मां सरस्वती की पूजा करने के लिए सबसे पहले मां सरस्वती की प्रतिमा सामने रखें. प्रतिमा रखने के बाद कलश स्थापित करके गणेश जी सहित नवग्रह की विधिवत पूजा अर्चना करें.

मां सरस्वती की पूजा करने के तरीके

सबसे पहले मां सरस्वती को आचमन और स्नान कराएं, मां को स्नान कराने के उपरांत फूलों की माला चढ़ाएं. इसके बाद मां सरस्वती को सिंदूर और सिंगार कि सभी वस्तुएं अर्पित करें. इसके बाद मां सरस्वती के चरणों में गुलाल अर्पित करें. मां सरस्वती श्वेत वस्त्र धारणी है, मां सरस्वती को श्वेत वस्त्र पहनाए, इसके साथ ही मां को पीले रंग का फल चढ़ाएं. मां सरस्वती के प्रसाद में मौसमी के अलावा बूंदी भी अर्पित करें. मां सरस्वती के इस शुभ दिन पर कई तीर्थ स्थानों पर माता को मालपुए और खीर का भोग लगाया जाता है.
माघ महीने के शुक्ल पक्ष वसंत पंचमी के दिन सरस्वती मां की पूजा के बाद षष्टी तिथि को सुबह ही उनकी पूजा करने के बाद उनका विसर्जन कर देना चाहिए. इस विधि के लिए संध्या काल में मूर्ति को प्रणाम करके जल में प्रवाहित करना चाहिए.

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