अब टीवी चैनल के लाइसेंस के लिए चुकाने होंगे करोड़ों रुपए

आने वाले समय में समाचार या मनोरंजन टीवी चैनल खोलने के लिए लाइंसेस खरीदने के लिए मोटी रकम देगी पड़ेगी. इस मामले में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भारतीय टेलीकॉम नियामक प्राधिकरण (ट्राई) से परामर्श मांगा है. ट्राई सभी संबंधित पक्षों और आम जनता से सलाह लेकर मंत्रालय को सुझाव देगी. देश में उदारीकरण की नीति के बाद निजी ऑपरेटरों को प्रसारण क्षेत्र में शामिल करने की नीति अपनाई गई थी और तब सरकार ने टेलीकॉम, एफएम रेडियो के लिए स्पेक्ट्रम, टीवी लाइसेंसिंग, कोयला खदान आदि जैसे प्राकृतिक संसाधनों के आंबटन में ऑपरेटरों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन दामों पर संसाधन आबंटित किए गए थे.

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हालांकि धीरे-धीरे इस नीति में फेरबदल किया गया जिसके बाद अब मोबाइल स्पेक्ट्रम नीलामी लगती है. एफएम रेडियो चैनलों के लिए भी नीलामी हो रही है और कोयला खदान आबंटन में हुए हुए घोटाले के बाद यह भी नीलामी की प्रक्रिया अपनाइ गई. लेकिन टीवी चैनल के लिए लाइसेंस लेने के लिए अभी भी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से अनुमति लेनी पड़ती है. अपलिंक और डाउनलिंक के लिए 10 हजार रुपये लाइसेंस फीस और दो लाख रुपये सालाना लाइसेंस फीस की रकम चुकानी पड़ती है. इसके लिए चैनलों को हर साल लाइसेंस रिन्यू करवाना पड़ता है. जिसके बाद अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में विचार किया जा रहा है कि क्यों न टीवी लाइसेंस आबंटन में भी नीलामी प्रक्रिया अपनाई जाए जिससे सरकार की मोटी कमाई होगी और चैनल ऑपरेटरों को भी सिंगल विंडो क्लीयरेंस मिल जाएगा.

अभी चैनल ऑपरेटर को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को आवेदन करना होता है. मंत्रालय उसे सेक्योरिटी क्लीयरेंस के लिए गृहमंत्रालय भेजता है। फ्रीक्वेंसी आबंटन के लिए संचार मंत्रालय के डब्लूपीसी और एओसीसी विभाग को भेजा जाता है और विदेशी निवेश के लिए डीआईपीपी और वित्तमंत्रालय भेजा जाता है. मंत्रालय ने ट्राई से यह भी सुझाव मांगा है कि टीवी चैनलों को अनुमति देने के लिए क्या सिंगल विंडो क्लीयरेंस प्रणाली स्थापित की जा सकती है या नहीं। आपको बता दें कि इस वक्त देश में 391 समाचार और समसामायिक चैनल व 492 नॉन न्यूज चैनल चल रहे हैं. भारत में मीडिया क्षेत्र में काफी तेज गति से विकास हो रहा है. 2016 में भारत में 12 हजार करोड़ रुपये का व्यवसाय था जो 2021 में बढ़कर 25 हजार करोड़ रुपये का हो जाएगा. मंत्रालय को नए चैनल खोलने के बहुत से आवेदन प्राप्त हुए हैं. इसी बात को ध्यान में रखकर सरकार ने ट्राई से सुझाव मांगा है.

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