फिर गरमाया समलैंगिकता का मुद्दा

एक बार फिर धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट में बहस शुरू होने वाली है. सुप्रीम कोर्ट ने साल 2013 में नाच फाउंडेशन मामले में समलैंगिकता को इस धारा के तहत अपराध माना गया था. अब सुप्रीम कोर्ट इस पर दोबारा से बहस करने पर विचार कर रहा हैं.

धारा 370 इस देश में अंग्रेजों ने 1962 में लागू किया था इसे कानून के तहत आप अप्राकृतिक यौन संबंध को गैरकानूनी ठहराया गया है. अगर कोई महिला और पुरुष आपसी सहमति से अप्राकृतिक यौन संबंध बनाते हैं तो धारा 377 के तहत उन्हें 10 साल की सजा व जुर्माने का प्रावधान है. सहमति से अगर कोई दो पुरुषों या महिलाओं के बीच सेक्स को भी इस कानून के दायरे में लाया गया है. इस धारा के अंतर्गत गिरफ्तारी के लिए किसी भी प्रकार के वॉरट की जरूरत नहीं होती. शक के आधार पर यह गुप्त सूचना का हवाला देकर पुलिस इस मामले में किसी को भी गिरफ्तार कर सकती है और धारा 377 जमानती अपराध है.

बता दें समलैंगिकता को अपराध बताने वाली धारा 377 को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी बैंच को रेफर कर दिया है. माना जा रहा है कि आप इसमें संविधानिक मुद्दे जुड़े हुए हैं. इस वजह से अब सुप्रीम कोर्ट इस पर दोबारा से बहस शुरू करेगा.

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