वेद की ऋचाएं पहुंची अदालत, हिंदी प्रार्थना पर बढ़ा बवाल

अब भारत में वेद की ऋचाएं भी सुप्रीम कोर्ट में घसीटी जा रही है. हर रोज सुबह केंद्र विद्यालय में होने वाली हिंदी संस्कृत की प्रार्थनाओं पर विवाद बढ़ता ही जा रहा है. यह पूरा विवाद केंद्र विद्यालयों में इन ऋचाओं को दैनिक प्रार्थना में शामिल करने को लेकर बड़ा है. इसी विषय पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है.

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दायर याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र में शासित मोदी सरकार और केंद्रीय विद्यालय संगठन को एक नोटिस जारी कर पूछा है कि हर रोज सुबह स्कूलों में होने वाली हिंदी और संस्कृत की प्रार्थना से किसी धार्मिक मान्यता को बढ़ावा मिल रहा है? तो इसकी जगह कोई सर्वमान्य प्रार्थना क्यों नहीं कराई जा सकती है?

कोर्ट ने इन सभी सवालों के जवाब 4 हफ्तों में तलब किए हैं. जिसके बाद कोर्ट फैसला करेगा कि क्या इससे किसी धर्म को बढ़ावा मिल रहा और संविधान का उल्लंघन हो रहा है?

दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट में विनायक शाह ने लगाई है. मोदी सरकार को नोटिस जारी करते हुए बेंच की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस आरएफ नरीमन ने बताया है कि यह एक महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दा है. यह याचिका एडवोकेट विनायक शाह ने दाखिल की है, जिनके बच्चे भी केंद्र विद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं.

विनायक शाह ने कहा है कि यह सभी स्कूली प्रार्थनाएं संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन है. भारत का संविधान हर नागरिक को इस बात की इजाजत देता है कि वह अपने धर्म का पालन करें. विनायक शाह ने कहा कि राज्य प्रायोजित कोई भी स्कूल किसी भी एक धर्म को प्रोत्साहित नहीं कर सकता है.

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