पहले ही डेब्यू भाषण में नहीं बोल पाए सचिन, सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित

गुरुवार को राज्यसभा सांसद सचिन तेंदुलकर ने पहली बार संसद की बहस में हिस्सा लिया. लेकिन हंगामे के कारण वह अपनी बात को सामने नहीं रख पाए. पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर विपक्ष के हंगामे के कारण अपनी बात को सामने नहीं रख पाए. ऐसे में राज्यसभा की कार्यवाही शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी गई. साल 2012 में मनोनीत होने के बाद सचिन तेंदुलकर का राज्यसभा में यह पहला भाषण था. लेकिन पहले भाषण में ही वह अपना डेब्यू सही से नहीं कर पाए. उन्होंने जैसे ही अपना भाषण शुरू किया वैसे ही विपक्ष का हंगामा शुरू हो गया. वह अपनी पत्नी के साथ राज्यसभा पहुंचे थे.

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जानकारी है कि सचिन तेंदुलकर अपना भाषण खेल व्यवस्था को लेकर देने वाले थे. वह कहने वाले थे की ओलंपिक की तैयारियां और भारतीय खिलाड़ी किस तरह से दुनिया भर में अपना प्रदर्शन कर सकते हैं. लेकिन विपक्षी हंगामा इतना तेज हुआ कि वह बोल ही नहीं पाए. वही सचिन तेंदुलकर रिटायरमेंट पर खिलाड़ी को मिलने वाले पैसे के मुद्दे पर भी बात करने वाले थे. जानकारी है कि सचिन तेंदुलकर स्कूली शिक्षा में खेल को पाठ्यक्रम के तौर पर शामिल करने पर जोर देने वाले थे. आपको बता दें कि सचिन तेंदुलकर ने राज्यसभा सांसद विकल्प के तौर पर महाराष्ट्र के दोंजा गांव को गोद लिया है.

इससे पहले सचिन तेंदुलकर की राज्यसभा में गैर मौजूदगी को लेकर कई बार सवाल उठाए गए हैं. लेकिन जिस वक्त विपक्षी संसद में हंगामा कर रहे थे उस वक्त उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू यह बार-बार बोल रहे थे कि कृपया शांति का दान दें जो व्यक्ति बोलना चाहता है वह भारत रत्न से सम्मानित है. इस व्यक्ति को पूरा देश देखता है. लेकिन विपक्षी लगातार हंगामा मचाते रहे. विपक्षियों के हंगामे के बीच समाजवादी पार्टी की नेता जया बच्चन ने कांग्रेस के रवैए पर काफी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जो देश का नाम कमा रहा है उसे बोलने ही नहीं दिया जाता.

आपको बता दें कि सचिन तेंदुलकर और रेखा दोनों ही 2012 में सदन में शामिल हुए थे. लेकिन दोनों की अनुपस्थिति को लेकर लगातार सवाल खड़े किए जा रहे थे. इस मामले में पिछले सत्र के दौरान नरेश अग्रवाल का कहना था कि जब सचिन और रेखा संसद में आते ही नहीं है तो उनकी सदस्यता रद्द क्यों नहीं की जाती. नरेश अग्रवाल का कहना था कि अगर विजय माल्या को सदन से निकाला जा सकता है तो इन दोनों को क्यों नहीं निकाला जा सकता.

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