मंत्रालयों ने कमर्शियल रेट पर विज्ञापन जारी करने की इजाजत मांगी

आम चुनाव से पहले मोदी सरकार की वोट कमाऊ योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए जारी विज्ञापनों को बड़े टीवी चैनलों ने मना कर दिया है. इसलिए फ्लैगशिप योजना वाले मंत्रालयों ने पीएमओ से इन विज्ञापनों को डीएवीपी रेट की जगह कमर्शियल रेट पर विज्ञापन जारी करने की आग्रह किया है. अखबारों के विज्ञापन रेट ठीक-ठाक हैं और विज्ञापन की संख्या ज्यादा होने के कारण बड़े अखबार डीएवीपी के विज्ञापनों को छापने से मना नहीं करते.

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लेकिन टीवी चैनलों में समय की कमी और अच्छी टीआरपी के कारण उन्होंने डीएवीपी के रेट पर सरकारी विज्ञापन लेने से मना कर दिया है. 8 नवम्बर को नोटबंदी के बाद भी चैनलों ने सरकारी अभियान चलाने से मना कर दिया था. अब सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान, स्वास्थ्य मिशन, जीएसटी, आयकर जमा करने जैसे अभियान के लिए रणनीति बनाई है.

लेकिन टीवी चैनल डीएवीपी दर सर विज्ञापन दिखाने को इस बार तैयार नहीं है. पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड , स्वास्थ्य मंत्रालय, केंद्रीय उत्पाद कर बोर्ड ने पीएमओ और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को आग्रह किया है कि जनरुचि के विज्ञापनों को टीवी चैनलों पर दिखाने के लिए डीएवीपी के जरिए जारी करने और डीएवीपी रेट पर ही जारी करने की शर्त में छूट दी जाए. मालूम हो कि सरकारी विज्ञापन दिखाने और उसके लिए रेट तय करने का अधिकार डीएवीपी को हैं और किसी भी मंत्रालय या विभाग व्यवसायिक रेट पर विज्ञापन जारी करने की अनुमति नहीं है.

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