अटल की राह पर मोदी, विपक्षी बोले हो सकता है इसी साल लोकसभा चुनाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार यह बात साफ कर चुके हैं कि वह लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ के पक्षधर है. बजट सत्र से पहले हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद में अपने अभिभाषण में मोदी सरकार की पिछले साढ़े तीन सालों की उपलब्धियां गिनाई. इसके साथ उन्होंने देश में एक साथ चुनाव करने की बात भी उठाई. राष्ट्रपति का कहना था बार-बार चुनाव का असर विकास पर पड़ता है.

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब किसी नेता या प्रधानमंत्री ने ऐसी बात कही हो. साल 2004 में भी तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने भी एक समय पर लोकसभा चुनाव करवाया था लेकिन उस चुनाव में बीजेपी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद यूपीए-1 का गठन हुआ जिसमें मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे. पाएम मोदी हमेशा से एक देश एक चुनाव की वकालत करते रहे हैं. बीते कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री ने एक टीवी चैनल के इंटरव्यू में कहा था कि वह इसकी पुरजोर वकालत करते हैं. उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल देश में किसी ना किसी प्रदेश में चुनाव होते रहते हैं और आचार संहिता लागू होती रहती है, जिसके चलते विकास कार्य रुक जाते हैं और राज्यों में अलग-अलग चुनाव करवाने से संसाधनों का भी खर्च बढ़ जाता है लेकिन एक बार चुनाव से करवाने से इससे बचा जा सकता है.

तो अब कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने पहले तो बजट सत्र छोटा रहने पर नाखुशी जताई है. साथ ही आरजेडी के प्रमुख लालू प्रसाद यादव तो काफी समय पहले से ही मोदी सरकार पर 2018 में लोकसभा चुनाव कराने की शंका जाहिर करते हैं. पिछले कुछ दिनों में सपा नेता अखिलेश यादव व बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने भी मोदी सरकार पर इसी साल लोकसभा चुनाव कराने की आशंका जाहिर की है. कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल लोकसभा चुनाव को 2019 में ही कराने के पक्ष में हैं.

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