साल का पहला आर्थिक सर्वेक्षण संसद में पेश, विकास दर 7.0-7.5 रहने का अनुमान

बजट सत्र से पहले वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण संसद में पेश किया. इस सर्वेक्षण के मुताबिक 2017-18 में विकास दर 7.0 से लेकर 7.5 फ़ीसदी रहने का अनुमान है. इस में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर भी चिंता जताई गई है.

रिपोर्ट के मुताबिक जीएसटी, बैंकों का पुनर्पूंजीकरण, एफडीआई के नियमों में ढील और ऊंचे नियम निर्यात की वजह से इस वित्त वर्ष और दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था अपनी रफ्तार पकड़ी है. वही कॉमर्स मिनिस्टर सुरेश प्रभु ने कहा है कि 2018 में जीडीपी ग्रोथ 2017 के मुकाबले काफी बेहतर रह सकती है. इस आर्थिक सर्वेक्षण में टैक्स भरने वालों की भी तादात में इजाफा देखने को मिला है. साल 2016-17 में जीवीए 6.6% रही थी, जो कि इस साल 6.1% रहने की उम्मीद जताई गई है.

इससे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने अभिभाषण से इसकी शुरुआत की शुरूआत की. अभिभाषण में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बजट को सब की अपेक्षाओं पर खरा उतरने वाला बताया. उसके साथ-साथ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा की मौजूदा सरकार कमजोर वर्ग के लोगों को समर्पित है. ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि इस बार का बजट अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों को देखकर बनाया गया है. इस बार के बजट में किसानों और मुख्य रूप से गरीबों पर ध्यान दिया जा सकता है. बजट के अलावा सरकार के पास कहीं महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करवाने पर भी जोर दे सकती है, जिनमें से तीन तलाक को पास कराना सरकार की पहली प्राथमिकता होगी. तीन तलाक के अलावा सरकार ओबीसी आयोग का संवैधानिक दर्जा देने वाले विधेयक को पारित कराने की भी कोशिश करेगी. यह दोनों ही विधायक राजनीतिक रुप से बेहद ही ज्यादा महत्वपूर्ण है.

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