चला गया भारत का बेटा, 1 रुपए लेता था सैलरी

BHU के पूर्व कुलपति और इंडिया में डीएनए टेस्ट के जनक कहे जाने वाले पद्मश्री प्रोफेसर डॉ लालजी सिंह का बीते रविवार निधन हो गया. हार्ट अटैक आने के बाद उन्हें BHU के आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने अपने जीवन की अंतिम सांसें ली. पद्मश्री प्रोफेसर डॉक्टर लालजी सिंह की खास बात यह है कि इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी के कुलपति होने के बावजूद भी वह मात्र एक रुपए सैलरी लिया करते थे.

पद्मश्री प्रोफेसर डॉ लालजी सिंह का कहना था कि साइंस के क्षेत्र में किए गए उसके कार्यों के लिए उन्हें भटनागर फेलोशिप मिला करता था, जो कि जीवन के लिए काफी है. पद्मश्री प्रोफेसर डॉक्टर लाल जी सिंह के पिता साधारण किसान थे. BHU के पीआरओ राजेश ने बताया कि प्रो लालजी सिंह वर्तमान में सेंटर फॉर सेलुलर मॉलिक्यूलर बायोलॉजी हैदराबाद के डायरेक्टर के तौर पर कार्यरत थे और वह हैदराबाद ही जाने वाले थे. प्रो लालजी सिंह को कार्डियो की परेशानी थी. बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचने पर उन्हें हार्ट अटैक आ गया. जिसके चलते प्रो लालजी सिंह को BHU हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था. जहां पर रात 10 बजे उन्होंने अपने जीवन की अंतिम सांस ली.

प्रो रामजीलाल ने भारत देश के सबसे चर्चित राजीव गांधी मर्डर केस, नैना साहनी मर्डर केस और भी कई केस की जांच में भारतीय फिंगरप्रिंट तकनीक के जरिए सुलझाया था.

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