पद्मावती विवाद: इतिहासकारों का होगा चयन, दिखाई जाएगी फिल्म

‘पद्मावती’फिल्म को देखने के लिए सेंसर बोर्ड सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने मानव संसाधन से इतिहासकारों का चयन करने को कहा है. ‘पद्मावती’ फिल्म को फिलहाल प्रमाण पत्र मिलने की संभावना नजर नहीं आ रही है. केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने विवादित ‘पद्मावती’ फिल्म को देखने के लिए इतिहासकारों की मांग की है. सेंसर बोर्ड ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखकर इतिहासकारों का पैनल मांगा है. मंत्रालय ने बोर्ड के पत्र को मानव संसाधन विकास मंत्रालय भेज दिया है. उसमें कहा गया कि वह इतिहासकारों का पैनल बनाकर दें.

padmawati

संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ का राजपूत बिरादरी विरोध कर रही है. समाज में तनाव की स्थिति को देखते हुए कई राज्यों ने फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी है. इस विवाद में संसद की याचिका समिति और स्थायी समिति भी कूद गयी थी. लेकिन अभी सेंसर बोर्ड ने फिल्म को प्रमाण पत्र जारी नहीं किया है. प्रमाण पत्र जारी करने के लिए सेंसर बोर्ड ने फिल्म की स्क्रीनिंग शुरू की है. सूत्रों के मुताबिक बोर्ड को लगता है कि फिल्म इतिहास से प्रेरित है.

इसलिए फिल्म को इतिहासकारों को दिखाना जरूरी है. बोर्ड ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को पत्र भेजकर इतिहासकारों का एक पैनल देने का आग्रह किय है. क्योंकि विद्यालय और भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन आता है. इसलिए सूचना मंत्रालय ने मानव संसाधन से एक इतिहासकारों का पैनल देने को कहा है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय इतिहासकारों कि पहचान कर रहा है.

सेसंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने संसद की स्थायी समिति में उपस्थित होकर कहा था कि यदि फिल्म में इतिहास का जिक्र हुआ और इतिहास से छेड़छाड़ हुई तो वह इतिहासकारों की मदद लेंगे. अलवत्ता संजय लीला भंसाली ने कहा था कि उनकी फिल्म इतिहास पर आधारित नहीं है बल्कि मलिक मोहमद जायसी की कविता पदमावत से प्रेरित है.

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