भारतीय फैसला: नहीं होगी राष्ट्रपति महात्मा गांधी की हत्या की दोबारा जांच

भारत में एक अहम फैसला लिया गया है. राष्ट्रपति महात्मा गांधी की हत्या की दोबारा जांच की किसी भी प्रकार की आवश्यकता नहीं है. इस मामले में न्याय मित्र अमरेंद्र शरण ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि बीते 6 दशकों के बाद महात्मा गांधी की हत्या की दोबारा जांच होने की कोई जरुरत नहीं है. मुंबई के रहने वाले पंकज फड़नवीस ने महात्मा गांधी की हत्या की दोबारा जांच के लिए जनहित याचिका दायर की है, इस याचिका में शरण को न्याय मित्र बनाया गया था. शरण ने न्यायमूर्ति एस ए बोबड़े की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के सक्षम मामले का सोमवार को विशेष उल्लेख किया जिसमें उन्होंने पीठ को बताया कि उनकी रिपोर्ट का यह निष्कर्ष निकला है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या की जांच की दोबारा जरूरत नहीं है.

दायर याचिका में याचिका कर्ता ने यह दावा किया है कि महात्मा गांधी की हत्या में नाथूराम गोडसे के अलावा विदेशी खुफिया एजेंसी का भी हार और हत्याकांड से जुड़े दस्तावेजों की अनदेखी की गई है. इसमें से विदेशी साजिश की बू आती है. इस याचिका का संज्ञान लेते हुए न्याय मित्र ने कहा है कि इस हत्याकांड में विदेशी खुफिया एजेंसियों के शामिल होने का आरोप एकदम बेबुनियाद है और इसका कोई साक्ष्य नहीं प्राप्त हुआ है. अधिवक्ता श्री शरण ने कहा कि उन्हें दस्तावेजों की तहकीकात से गौर से के अलावा किसी भी अन्य के शामिल होने की गुंजाइश नजर नहीं आती हैं. इसलिए मामले की फिर से जांच करने का कोई दायित्व नहीं होता है.

याचिकाकर्ता के सभी दावों को नकारा गया है

उन्होंने कहा पहले पुख्ता जांच हुई, किसी विदेशी एजेंसी का हाथ होने अन्य दो लोगों के फायरिंग करने और चार गोली लगने के दावों में दम नहीं है. इस मामले में मुंबई के शोधकर्ता डॉक्टर फडणवीस ने दोबारा जांच की मांग करते हुए याचिका दायर की थी. इस मामले में दायर की गई याचिका कर्ता का कहना है कि गांधीजी की हत्या में किसी विदेशी एजेंसी का हाथ हो सकता है. इस मामले में न्यायालय ने कहा है कि वह इस मुद्दे की सुनवाई की अगली तारीख 12 जनवरी को इस मुद्दे पर विचार करेंगे.

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