जज लोया केस: SC के फैसले के बाद कांग्रेस ने खड़े किए 10 सवाल

जज लोया की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया. शीर्ष कोर्ट ने इस मामले में SIT जांच की याचिका को खारिज कर दिया. इस फैसले पर कांग्रेस पार्टी ने सवाल खड़े किए हैं. गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन कर कांग्रेस पार्टी ने कहा कि इस मामले में कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं.

रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि जज लोया की मौत के बाद दो और साथियों की भी मौत हुई थी. इस मामले में कई तरह के आरोप सामने आए. मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

जज लोया केस: SC के फैसले के बाद कांग्रेस ने खड़े किए 10 सवाल    congress press confrence judge loya case supreme court  जज लोया की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया. शीर्ष कोर्ट ने इस मामले में SIT जांच की याचिका को खारिज कर दिया. इस फैसले पर कांग्रेस पार्टी ने सवाल खड़े किए हैं. गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन कर कांग्रेस पार्टी ने कहा कि इस मामले में कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं.  रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि जज लोया की मौत के बाद दो और साथियों की भी मौत हुई थी. इस मामले में कई तरह के आरोप सामने आए. मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.   उन्होंने कहा कि भारत के लोगों को जवाब चाहिए. जांच से ही सब कुछ स्पष्ट हो पाएगा. लेकिन जज लोया के मामले में अब तक जांच नहीं हुई है. कोई तय नहीं कर सकता कि मौत प्राकृतिक है या नहीं. क्या केवल जजों के बयान के आधार पर अन्य दस्तावेज और संदिग्ध परिस्थितियों को दरकिनार किया जा सकता है.  उन्होंने कहा कि जजों ने 164 CRPC के तहत बयान नहीं दिया, पुलिस को दिया बयान अदालत में मान्य नहीं है. उन्होंने कहा कि जांच से ही संदेह से पर्दा हट सकता है.  जज लोया के मामले को सुप्रीम कोर्ट के जजों ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाया.  सुरजेवाला ने कहा कि आज का दिन काफी दुखद है, जज लोया की मौत का जांच मामला काफी गंभीर था. उन्होंने कहा कि वो सोहराबुद्दीन मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें अमित शाह का नाम आया था. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद भी कई तरह के सवाल बाकी हैं. उन्होंने कई तरह के सवाल उठाए.  1. सोहराबुद्दीन और प्रजापति के केस को 2012 में जजों का ट्रांसफर किया गया था. जज उत्पत का भी ट्रांसफर कर दिया गया था.  2. जज लोया को 100 करोड़ रुपए की रिश्वत, एक फ्लैट देने की पेशकश की गई थी.  3. जज लोया की मौत का हार्ट अटैक से मौत बताया गया था. लेकिन ईसीजी की रिपोर्ट में ऐसा कुछ भी नज़र आया था.  4. नागपुर में उनकी सुरक्षा को हटा दिया गया था.  5. जज लोया मुंबई से नागपुर ट्रेन के जरिए गए थे.  6. जज लोया के नागपुर रेलभवन में रुकने का कोई रिकॉर्ड नहीं.  7. जिस गेस्ट हाउस में जज लोया रुके हुए थे, वहां कई कमरे थे. लेकिन तीन जज उसी कमरे में ही क्यों रुके हुए थे.  8. परिवार को जज लोया के कपड़ों में गर्दन के पास खून मिला था.  9. पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट में उनका नाम गलत लिखा गया था.  10. जज लोया की मौत के बाद दो अन्य जजों की भी मौत हुई जिस पर भी कई तरह के सवाल हैं.  सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की स्वतंत्र जांच कराने की अपील को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि मामले का कोई आधार नहीं है, इसलिए इसमें जांच नहीं होगी. तीन जजों की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि चार जजों के बयान पर संदेह का कोई कारण नहीं है, उनपर संदेह करना संस्थान पर संदेह करने जैसा होगा. शीर्ष कोर्ट ने कहा कि इस मामले के लिए न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है.    सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाई. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन वकीलों ने ये याचिका डाली है, उन्होंने इसके जरिए न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश की है. ये अदालत की आपराधिक अवमानना करने जैसा है. शीर्ष कोर्ट ने कहा कि ये याचिका राजनीतिक फायदे और न्यायपालिका की प्रक्रिया पर सवाल उठाने के लिए किया गया.
randeep surjewala

उन्होंने कहा कि भारत के लोगों को जवाब चाहिए. जांच से ही सब कुछ स्पष्ट हो पाएगा. लेकिन जज लोया के मामले में अब तक जांच नहीं हुई है. कोई तय नहीं कर सकता कि मौत प्राकृतिक है या नहीं. क्या केवल जजों के बयान के आधार पर अन्य दस्तावेज और संदिग्ध परिस्थितियों को दरकिनार किया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि जजों ने 164 CRPC के तहत बयान नहीं दिया, पुलिस को दिया बयान अदालत में मान्य नहीं है. उन्होंने कहा कि जांच से ही संदेह से पर्दा हट सकता है. जज लोया के मामले को सुप्रीम कोर्ट के जजों ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाया.

सुरजेवाला ने कहा कि आज का दिन काफी दुखद है, जज लोया की मौत का जांच मामला काफी गंभीर था. उन्होंने कहा कि वो सोहराबुद्दीन मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें अमित शाह का नाम आया था. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद भी कई तरह के सवाल बाकी हैं. उन्होंने कई तरह के सवाल उठाए.

1. सोहराबुद्दीन और प्रजापति के केस को 2012 में जजों का ट्रांसफर किया गया था. जज उत्पत का भी ट्रांसफर कर दिया गया था.

2. जज लोया को 100 करोड़ रुपए की रिश्वत, एक फ्लैट देने की पेशकश की गई थी.

3. जज लोया की मौत का हार्ट अटैक से मौत बताया गया था. लेकिन ईसीजी की रिपोर्ट में ऐसा कुछ भी नज़र आया था.

4. नागपुर में उनकी सुरक्षा को हटा दिया गया था.

5. जज लोया मुंबई से नागपुर ट्रेन के जरिए गए थे.

6. जज लोया के नागपुर रेलभवन में रुकने का कोई रिकॉर्ड नहीं.

7. जिस गेस्ट हाउस में जज लोया रुके हुए थे, वहां कई कमरे थे. लेकिन तीन जज उसी कमरे में ही क्यों रुके हुए थे.

8. परिवार को जज लोया के कपड़ों में गर्दन के पास खून मिला था.

9. पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट में उनका नाम गलत लिखा गया था.

10. जज लोया की मौत के बाद दो अन्य जजों की भी मौत हुई जिस पर भी कई तरह के सवाल हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की स्वतंत्र जांच कराने की अपील को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि मामले का कोई आधार नहीं है, इसलिए इसमें जांच नहीं होगी. तीन जजों की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि चार जजों के बयान पर संदेह का कोई कारण नहीं है, उनपर संदेह करना संस्थान पर संदेह करने जैसा होगा. शीर्ष कोर्ट ने कहा कि इस मामले के लिए न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाई. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन वकीलों ने ये याचिका डाली है, उन्होंने इसके जरिए न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश की है. ये अदालत की आपराधिक अवमानना करने जैसा है. शीर्ष कोर्ट ने कहा कि ये याचिका राजनीतिक फायदे और न्यायपालिका की प्रक्रिया पर सवाल उठाने के लिए किया गया.

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