स्वच्छ भारत मिशन से बच रहे हैं 50,000 तक रूपये: आर्थिक सर्वेक्षण

सरकार के स्वच्छता कार्यक्रम से स्वास्थ्य एवं आर्थिक प्रभाव पड़ा है और खुले में शौच से मुक्त गांव में प्रति परिवार सालाना 50,000 रुपए की बचत का अनुमान है. बजट सत्र से पहले वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण संसद में पेश किया. इस सर्वेक्षण के मुताबिक 2017-18 में विकास दर 7.0 से लेकर 7.5 फ़ीसदी रहने का अनुमान है.

आर्थिक सर्वेक्षण की मानें तो अब तक पूरे देश में 296 जिलों तथा 3,07,349 गांव को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित हो चुके है. वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा संसद में आज पेश 2017-18 की आर्थिक समीक्षा के अनुसार दो अक्टूबर 2014 को शुरू किये गये स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) कार्यक्रम की शुरूआत के बाद ग्रामीण क्षेत्र में स्वच्छता का दायरा 2014 के 39% से बढ़कर जनवरी, 2018 में 76% हो गया हैं.

सर्वेक्षण में बताया गया है कि साल 2014 में खुले में शौच जाने वाले लोगों की संख्या 55 करोड़ थी, जो साल 2018 में आते-आते घटकर 25 करोड़ तक रह गई हैं. सर्वेक्षण में कहा गया है कि आठ राज्यों और दो केन्द्रशासित प्रदेशों – सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, केरल, हरियाणा, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, दमन और दीव तथा चंडीगढ़ को खुले में शौच से पूर्ण रूप से मुक्त घोषित किया गया है.राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएस) तथा भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई) की रिपोर्टों के आधार पर आकलन किया गया है कि ओडीएफ गांव में एक परिवार प्रतिवर्ष 50,000 रुपये की बचत करता हैं.

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