माल्या को भारत लाने कि कोशिश में कितना हुआ खर्च, CBI ने खर्च बताने से किया इनकार

भारतीय कारोबारी और भगोड़े विजय माल्या का नाम एक बार फिर से सुर्खियों में आ चुका है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने विजय माल्या को भारत लाने की कोशिश में हुए खर्च को बताने से इनकार कर दिया है. सीबीआई का कहना है कि उसे आरटीआई एक्ट के तहत इस प्रकार की जानकारी का खुलासा करने से छूट हासिल है.

आरटीआई एक्ट एक्ट यह कहता है कि किसी भी सार्वजनिक प्राधिकरण के पास मौजूद भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ी सूचना और झूठ के दायरे में नहीं आती है. सूत्रों से मिली खबर के अनुसार पुणे के आरटीआई कार्यकर्ता विहार धुर्वे ने 9,000 करोड़ रुपए का बैंक लोन वापस न करने के आरोप को लेकर भारत से भागे विजय माल्या और आईपीएल (IPL) मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच का सामना कर रहे ललित मोदी को भारत वापस लाने पर हुए खर्च का सीबीआई से ब्योरा मांगा था. उन्होंने यह जानकारी मांगी थी कि दोनों भगोड़ों को देश वापस लाने के लिए भारत सरकार ने अभी तक कुल कितना कानूनी खर्च और यात्रा संबंधी खर्च किया गया है.

वित्त मंत्रालय ने सीबीआई के पास आरटीआई आवेदन भेजा था. एजेंसी ने उसे इस तरह के मामलों की जांच करने वाले विशेष जांच दल के पास भेजा था. आरटीआई आवेदन के जवाब में उसे 2011 सरकारी अधिसूचना के जरिए आरटीआई अधिनियम के तहत किसी भी प्रकार का खुलासा करने से छूट मिली हुई है.

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