भड़की हिंसा: बढ़ती जातीय हिंसा के चलते, स्कूल और बसों पर पड़ा असर

भारत में जातीय हिंसा अपने चरम पर पहुंच रही है और महाराष्ट्र के पुणे से शुरु हुई हिंसा समूचे महाराष्ट्र राज्य को प्रभावित कर रही है. दो दिन पहले भीमा कोरेगांव में हिंसा का उदय हुआ और बीते दो दिनो से ही पूरे राज्य में जनजीवन को अस्तव्यस्त करके रख दिया है. हिंसा को बढ़ता देख राज्य के मुख्यमंत्री और अन्य राज्य नेताओं ने हिंसा की जांच और इस मामले में कारवाई करने के आदेश तत्काल दे दिए है. यह हिंसा एक जनवरी को पुणे के भीमा कोरेगांव में दलित समाजके शौर्य दिवस पर भड़की थी जिसके विरोध में बीआर अम्बेडकर के पोते और कुछ कार्यकर्ताओं ने बुधवार को महाराष्ट्र बंद करने का एलान किया है.

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पुणे से शुरु होकर पूरे महाराष्ट्र में फैल रही हिंसा का असर अब संसद में भी देखने को मिल रहा है. इस मामले में कांग्रेस सांसद रजनी पाटिल और समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल ने राज्यसभा में एक स्थगन प्रस्ताव नोटिस प्रस्तुत किया है, यह नोटिस राज्यसभा में नियम 267 के तहत प्रस्तुत किया गया है. इसके साथ ही मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी राज्यसभा में नियम 56 तहत स्थन प्रस्ताव का नोटिस दिया है और भी कई अन्य राजनीतिक पार्टियों के नेताओ ने राज्यसभा में नोटिस दिया है.

जातीय हिंसा के चलते मुंबई में बुधवार को सभी स्कूलों, बसों के सेवा को बंद कर दिया गया है. स्कूलों के मालिकों का कहना है की हम अपने बच्चों के भविष्य से किसी भी प्रकार का रिस्क नहीं लिया जा सकता है. हम बुधवार दोपहर को राज्य के हालातों को देखते हुए यह फैसला लेंगे की दूसरी पीरीयड में बस को चलाया जा सकता है या नहीं. कुछ स्कूलों के शिक्षकों ने बताया है की हमने बच्चों के अभिवावकों पर छोड़ दिया है की वह अपने बच्चों को स्कूल भेजना चाहते है या फिर नहीं. बुधवार के दिन देखा गया की स्कूलों में मात्र 50 बच्चे ही स्कूल आए है ऐसे में हमने उन बच्चों को भी उनके घर भेज दिया है. इस बढ़ती हिंसा ने बहुत सी लोकल ट्रेंनों और बसों पर भी इसका असर पड़ा है.

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