क्या आने लगे है ‘अच्छे दिन’ ?

जहां पूरे देश में अभी चुनावों का माहौल है, वहीं इसी बीच ऐसे आंकड़े आए जिसमें मोदी सरकार के फैसलों की समीक्षा कर डाली. पिछले साल हुई नोटबंदी और साल 2017 में लागू जीएसटी ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को 5.7 पर ला खड़ा किया था. इस चालू वित्त वर्ष में पहली बार जीडीपी 6% के पार जा चुकी है. इससे पहले की तिमाहियों में जीडीपी लगातार गिर रही थी. पिछली तिमाही में तो 3 साल की सबसे न्यूनतम स्तर पर जीडीपी आ गई थी.


लेकिन केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय से आए आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में खत्म हुई तिमाही में एक बार फिर से निवेश बढ़ा है और मांग भी बनी रहे जिस से जीडीपी का आकड़ा 6.3 फिसदी तक जा पहुंचा. इस रिपोर्ट के आने के बाद सरकार ने फिर एक बार अपनी पीठ थपथपाई है. वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है किन नोटबंदी और जीएसटी का असर अब बीत चुका है और आने वाली तिमाहियों में वृद्धि दर में और तेजी देखी जा सकेगी. उन्होंने पिछली तिमाही में जीडीपी कम होने होने की वजह भी बताएं उनका कहना था कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद अर्थव्यवस्था को बदलाव की चुनौती झेलनी पड़ी थी लेकिन अब वह दौर गुजर चुका है और आने वाले वित्त वर्ष में इसका बिल्कुल उलट असर देखने को मिलेगा.

आपको बता दें पहली तिमाही में सिर्फ 1.6 फीसदी निवेश बड़ा था, जिसमें पिछली तिमाही के दौरान 4.6 फ़ीसदी की तेजी देखी गई. जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी कुल 27 पॉइंट 5 फ़ीसदी है, जो कि पिछली तिमाही में 29.9 फ़ीसदी थी. वित्त मंत्रालय के कुछ अधिकारियों की माने तो इसके पीछे जीएसटी का कुछ असर हो सकता है. भारत आर्थिक वृद्धि के मामले में अब सिर्फ चीन से पीछे रह गया है. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय से आए आंकड़े सरकार के लिए किसी राहत से कम नहीं है. नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद जिस तरह से जीडीपी लगातार गिर रही थी, उससे सरकार हमेशा विपक्षियों के निशाने पर रही चिर प्रतिद्वंदी कांग्रेस ने इसका पूरे देश भर में विरोध करा था. हालांकि इसमें कृषि शेत्र और सेवा क्षेत्र में काफी सुस्ती देखी गई.

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