GST का एक साल: जानें, क्या रहा हासिल और खामियां

नई दिल्ली | देश में गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स यानी GST को लागू हुए अब करीब एक साल पूरे होने वाला है। बीते साल 1 जुलाई को संसद का विशेष सत्र बुलाकर GST को लागू किया गया था। शुरुआती दिनों में जीएसटी की जटिलताओं को लेकर कुछ सवाल खड़े किए गए थे, लेकिन अब यह लागू है और देश भर में काम कर रहा है। अब भी जीएसटी को लेकर कई काम होने बाकी हैं, लेकिन बीते एक साल में जीएसटी को लेकर व्यापारियों का भरोसा समय के साथ मजबूत होता गया है। जानें, एक साल में जीएसटी कितना रहा कामयाब और कहां रहीं खामियां…

हंगाई दर में नहीं हुआ इजाफा: GST को लेकर आशंका जताई जा रही थी कि इससे देश में महंगाई बढ़ सकती है। सिंगल टैक्स सिस्टम लागू करने वाले कई देशों में ऐसा देखा गया था, लेकिन भारत में स्थिति सामान्य रही। हाल में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में इजाफा हुआ है, लेकिन इसकी वजह जीएसटी नहीं है बल्कि फूड और फ्यूल की महंगाई है। जीएसटी के चलते महंगाई न बढ़ने की वजह यह भी है कि पहले कई तरह के टैक्स लगते थे। इस तरह यदि जीएसटी को लेकर लगता है कि टैक्स अधिक है, तब भी वह सबको मिलाकर जितना लगता था उससे कम या बराबर ही है। इसके अलावा भले ही जीएसटी लागू होने के बाद ऐंटी-प्रॉफिटियरिंग एजेंसी का गठन हुआ हो, लेकिन उसे चलते टैक्स के प्रावधानों का दुरुपयोग होने की आशंकाएं खत्म हुई हैं।

सिंगल नैशनल मार्केट: राज्यों की सीमाओं पर पहले ट्रकों की लंबी लाइनें लगी रहा करती थीं। अब पूरे देश के एक बाजार के रूप में तब्दील होने के चलते यह स्थिति खत्म हो गई थी। इसके चलते ट्रांजैक्शंस में देरी होती थी और सामान भी बेवजह अटका रहता था।

एक देश एक टैक्स: GST का सबसे बड़ा लाभ यह है कि कन्याकुमारी का कोई व्यक्ति भी उतना ही टैक्स देता है, जितना जम्मू-कश्मीर के किसी कारोबारी को देना होता है। GST के चलते डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम, प्रॉडक्शन, सप्लाइ चेन, स्टोरेज भी मजबूत हुई है।

टैक्स का दायरा बढ़ना: जीएसटी के चलते इकॉनमी का फॉर्मलाइजेशन होगा। इसके चलते टैक्स के दायरे से बचना मुश्किल हुआ है, पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था होगी, इनवॉइस मैचिंग और इनसेंटिव ऑफ इनपुट क्रेडिट की भी सुविधा मिलेगी। अब तक जीएसटी के तहत 1 करोड़ कारोबारियों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। एंप्लॉयीज प्रविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन के सबस्क्राइबर्स की संख्या में इजाफा होना भी इसका सबूत है। इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा लोगों के रिटर्न फाइल करने के चलते भी कलेक्शन में इजाफा किया है।

हर किसी की जीत: करीब 17 प्रकार के टैक्स और कई सेस का GST में विलय हो गया है। एक्साइज ड्यूटी, सर्विसेज टैक्स, काउंटरवेलिंग ज्यूटी और वैट, परचेज टैक्स जैसे राज्य कर अब जीएसटी में ही समाहित हो गए हैं। जीएसटी के चलते टैक्स क्रेडिट का फ्री फ्लो हुआ है। कंपनियों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और इसका फायदा ग्राहकों को मिला है।

कहां रह गई हैं खामियां
अनुपालन में अभी और दुरुस्त होने की जरूरत: GST के कंप्लायंस में सबसे अधिक समस्या आ रही है। खासतौर पर तकनीकी समस्या के चलते कई बार व्यापारियों को मुश्किलें आई हैं। इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ही रिटर्न फाइलिंग का एक नया फॉर्म तैयार किया गया है।

रजिस्ट्रेशन सिस्टम में जटिलता: कई तरह के रजिस्ट्रेशन की जरूरतों के चलते इंडस्ट्री को जटिलता महसूस हो रही है। कई मामलों में हर राज्य में रजिस्ट्रेशन कराए जाने की जरूरत है। कंपनियों को इस बात की आशंका रहती है कि कई मल्टिपल रजिस्ट्रेशन के चलते मल्टिपल ऑडिट और असेसमेंट होगा, जिससे आने वाले समय में जीवन और मुश्किल होगा।

नए सेस का लागू होना: जीएसटी के चलते कई तरह के टैक्सों का विलय हो गया है, लेकिन इसके बाद भी एक नए तरह की लेवी लागू हो गई है। लग्जरी गुड्स पर कॉम्पेन्सेशन सेस लागू कर दिया गया है। इसके बाद इन्हें ऑटोमोबाइल में लागू किया गया। यही नहीं अब ऐसा ही सेस शुगर पर भी लगाने पर विचार किया जा रहा है।

एक्सपोर्ट्स को रिफंड की प्रॉब्लम: एक्सपोर्ट्स रिफंड मेकेनिज्म, डेटा मैचिंग लॉ में जटिलता। इसके लिए सरकार की ओर से अब तक कई प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन अब भी इसमें दखल की जरूरत है।

अप्रैल में 1 लाख करोड़ के पार हुआ GST कलेक्शन

महीना जीएसटी कलेक्शन (रुपए करोड़)*
मई-18 94,016
अप्रैल-18 1,03,000
मार्च-18 89,264
फरवरी-18 88,047
जनवरी-18 88,929
दिसंबर-17 83,716
नवंबर-17 85,931
अक्टूबर-17 95,132
सितंबर-17 93,029
अगस्त-17 93,590
जुलाई-17 92,283
11 महीने का औसत 91,539
11 महीने का टोटल 10,06,937

 

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