पहले दिए करोड़ो के विज्ञापन, अब सैलरी देने को पैसा नहीं

0
92
ARVIND-KEJARIWAL
ARVIND-KEJARIWAL

उपमुख्यमंत्री ने बताया इस साल राजस्व में 78 फीसदी की गिरावट आई है.

दिल्ली सरकार ने केंद्र से 5000 करोड़ की आर्थिक सहयता मांग की है. दिल्ली सरकार ने यह मदद अपने कर्मचारियों को वेतन देने के लिए मांगे है. दिल्ली के डिप्टी CM मनीष सिसोदिया ने बातया की पिछले दो माह में जीएसटी से मात्र 500 करोड़ मासिक का संग्रह हुआ है. जीएसटी तथा अन्य स्रोत मिलाकर प्रथम तिमाही में कुल 1735 करोड़ रुपये मात्र का संग्रह हुआ है. जबकि केवल सैलरी तथा ऑफिस खर्च न्यूनतम 3500 करोड़ का मासिक खर्च है.

ऐसे में सवाल उतना लाजमी है जब दिल्ली सरकार के पास अपने कर्मचारियों के लिए वेतन नहीं था तो क्यों सरकार ने करोडो रूपए के विज्ञापन दिए? आप को बता दे की हाल ही मे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगभग देश के सारे न्यूज़ चैंनलों पर करीब 20 मिनट का विज्ञानरूपी कार्यक्रम चलवाया था. इतना ही नहीं दिल्ली सरकार करोड़ो रूपए के विज्ञापन देश के तमाम अकबरो को भी दे रही है. ज़ाहिर से बात है यह पैसा सरकारों का नहीं बल्कि आप जैसी भोली-भली जनता का ही पैसा है.तो इस गैर जिम्मेवार सरकार को ऐसा करना शोभा देता है? कुछ आप नेता कार्येकर्ता इससे पिछली सरकारों की तुलना मे ठीक बताते है,मगर क्या अरविंद केजरीवाल इस देश की राजनीत बदलने नहीं आये थे? वो तो एक अलग राजनीत करने आये थे, अपने शपथ समारोह मैं भी उन्होंने ‘इंसान का नाता इंसान’ का गाना के क्या सन्देश दिया?

इस संकट की घडी में भी दिल्ली की बेशर्म सरकार मौत के आंकड़ों को लेकर भी झूठ बोल रही है. कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली मे मौत का आंकड़ा इस वक्त नौ सौ के पर पहुंच चूका है,जबकि केजरीवाल सरकार अभी भी 400 मौत बता रही है. अपने सन्देश में पहले केजरीवाल कहते थे की दिल्ली वालो को चिंता करने की जरुरत नहीं है, क्यूंकि हमारे पास बहुत अच्छी सुविधा के साथ-साथ कई COVID बेड मौजूद है. लेकिन जैसी ही आंकड़ा 17 हज़ार के पास पंहुचा सरकार ने अपने हाथ खड़े कर दिए है. अब देखना होगा की केंद्र सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

16 + 19 =